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लखनऊ: डीसीपी पश्चिम का सख्त निर्देश, लंबित मामलों का हो जल्द निस्तारण

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विश्व रक्तदाता दिवस: इंदौर में समाजसेवियों ने रक्तदान कर बचाई बेसहारा मरीज की जान

विश्व रक्तदाता दिवस पर मानवता का अनुकरणीय संदेश: इंदौर के स्वयंसेवकों ने पेश की मिसाल ​अजय बियानी, रिपोर्टर, अटल सत्य टी वी न्यू...

विश्व रक्तदाता दिवस: इंदौर में समाजसेवियों ने रक्तदान कर बचाई बेसहारा मरीज की जान

विश्व रक्तदाता दिवस पर मानवता का अनुकरणीय संदेश: इंदौर के स्वयंसेवकों ने पेश की मिसाल
​अजय बियानी, रिपोर्टर, अटल सत्य टी वी न्यूज़ 24
​इंदौर। विश्व रक्तदाता दिवस का अवसर समाज में सेवा और परोपकार के नए उदाहरण स्थापित कर गया। निपानिया क्षेत्र की विभिन्न आवासीय सोसायटियों से जुड़े जागरूक समाजसेवियों ने मानवता का परिचय देते हुए एक बेसहारा मरीज के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
​घटनाक्रम के अनुसार, महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (MY Hospital) में भर्ती एक जरूरतमंद मरीज को तत्काल ऑपरेशन के लिए रक्त की नितांत आवश्यकता थी। जैसे ही यह सूचना स्थानीय समाजसेवियों तक पहुँची, वे बिना किसी देरी के अस्पताल पहुँचे और रक्तदान कर मरीज के उपचार में तत्काल सहयोग प्रदान किया।
​रक्तदान ही जीवनदान
​इस पुनीत कार्य में सम्मिलित स्वयंसेवकों ने समाज को एक सकारात्मक संदेश देते हुए कहा कि "रक्तदान वास्तव में जीवनदान के समान है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के युग में भी रक्त का कोई विकल्प तैयार नहीं हो पाया है, इसीलिए रक्तदान का महत्व सदैव बना रहेगा। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को नियमित अंतराल पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
​प्रेरणा बनी यह पहल
​निपानिया क्षेत्र के रहवासियों द्वारा दिखाई गई यह संवेदनशीलता न केवल मरीज के परिवार के लिए बड़ी राहत बनी, बल्कि समाज में एकजुटता और परोपकार की एक नई प्रेरणा भी दे गई। कठिन समय में एक-दूसरे के काम आना और मानवता के लिए समर्पित रहना ही सच्चे समाज की पहचान है।

लखनऊ अस्पताल शर्मसार! गर्भवती महिला से सुरक्षाकर्मियों की बदसलूकी!​गार्डों ने दिखाया 'रावण' रूप! अहिमामऊ मातृ शिशु केंद्र में भारी हंगामा।

लखनऊ: सरकारी अस्पतालों में दबंगई का बोलबाला, गर्भवती महिला और परिजनों से बदसलूकी; स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल

लखनऊ | रिपोर्ट: अटल बिहारी शर्मा

​उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत दावों से उलट नजर आ रही है। एक ओर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार औचक निरीक्षण और कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में तैनात सुरक्षाकर्मी मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। ताजा मामला लखनऊ के अहिमामऊ स्थित मातृ शिशु केंद्र से सामने आया है, जहाँ मानवता को शर्मसार करने वाली घटना घटी है।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला अपने परिजनों के साथ नियमित जांच (Routine Check-up) के लिए अहिमामऊ मातृ शिशु केंद्र पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात सुरक्षा गार्डों ने सहयोग करने के बजाय सीधे बदतमीजी शुरू कर दी। बात इतनी बढ़ गई कि सुरक्षाकर्मी 'दबंगई' पर उतर आए और परिजनों के साथ न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि मारपीट करने पर भी आमादा हो गए।

"हम यहाँ इलाज कराने आए हैं या अपमान सहने? अगर गर्भवती महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो आम जनता कहाँ जाएगी?" — घटना के दौरान एक आक्रोशित तीमारदार का बयान।


अस्पताल बना 'अखाड़ा', मरीजों में भारी नाराजगी

​इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। मौके पर मौजूद अन्य मरीजों और तीमारदारों ने भी सुरक्षा गार्डों की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; लखनऊ के कई सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा गार्ड खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं और मरीजों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री की सख्ती के बावजूद ढाक के तीन पात

​गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक लगातार अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं और लापरवाह डॉक्टरों व कर्मचारियों पर गाज गिरा रहे हैं। इसके बावजूद, निचले स्तर पर व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। दलाली, लापरवाही और अब सुरक्षाकर्मियों की गुंडागर्दी ने सरकारी अस्पतालों की छवि को धूमिल कर दिया है।

जनता की प्रमुख मांगें और सवाल:

​इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • दोषियों पर कार्रवाई: मामले की निष्पक्ष जांच कर बदसलूकी करने वाले गार्डों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
  • CCTV की जांच: अस्पताल में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
  • सुरक्षा कर्मियों की समीक्षा: अस्पतालों में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों और उनके कर्मियों के व्यवहार की समीक्षा हो।
  • सम्मानजनक व्यवहार: यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी गर्भवती महिला या मरीज के साथ ऐसी घटना न हो।

निष्कर्ष:

राजधानी के अस्पतालों में यदि गर्भवती महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

अटल सत्य टी वी न्यूज 24 के लिए, लखनऊ से अटल बिहारी शर्मा की रिपोर्ट।

बिना लाइसेंस अस्पताल बना जानलेवा, ऑपरेशन टेबल पर महिला ने तोड़ा दम।

हेडलाइन:
अतरौली में अवैध अस्पताल बना “मौत का अड्डा”, ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत से मचा हड़कंप
स्लग: अलीगढ़ / अतरौली
रिपोर्ट: दीपक भारद्वाज, अलीगढ़
अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील में बिना लाइसेंस संचालित प्राइवेट अस्पतालों का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला छर्रा रोड स्थित ‘यश अस्पताल’ का है, जहां एक 40 वर्षीय महिला की ऑपरेशन के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कदौली निवासी सर्वेश देवी (40 वर्ष), पत्नी स्वर्गीय गेंदालाल, को करीब पांच दिन पहले इलाज के लिए यश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के पास न तो कोई वैध लाइसेंस है और न ही वहां योग्य डॉक्टर मौजूद थे। इसके बावजूद महिला का ऑपरेशन किया गया, जिसके दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतका अपने पीछे चार बेटियां छोड़ गई हैं। बताया जा रहा है कि परिवार पहले ही संकट में था, क्योंकि करीब तीन साल पहले उनके पति गेंदालाल की भी मृत्यु हो चुकी थी। अब मां के निधन के बाद बेटियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि अतरौली क्षेत्र में कई अवैध अस्पताल और क्लीनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जहां बिना डिग्री और बिना रजिस्ट्रेशन के इलाज किया जा रहा है। अस्पतालों के बोर्ड पर बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम लिखे होते हैं, लेकिन असलियत में झोलाछाप लोगों द्वारा ऑपरेशन तक किए जाते हैं।
लोगों में यह भी चर्चा है कि इन अवैध अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग का संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि हर बड़ी घटना के बाद पैसे लेकर मामले को दबा दिया जाता है। इस मामले में भी कथित तौर पर लेन-देन की बातें सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बेखौफ संचालक, बेबस जनता
लगातार शिकायतों और मौतों के बावजूद इन अस्पतालों पर कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में ये “मौत के अड्डे” चल रहे हैं? क्या गरीब और असहाय लोगों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई है?
फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि अलीगढ़ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाते हैं या फिर एक और घटना का इंतज़ार किया जाएगा।
(अटल सत्य टीवी न्यूज 24)

अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल: 118 नियुक्तियों की फाइलें 'लापता', भ्रष्टाचार या सोची-समझी साजिश?

अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग: 118 नियुक्तियां और 'लापता' फाइलें— भ्रष्टाचार का बड़ा खेल या महज लापरवाही?
अलीगढ़ (दीपक भारद्वाज): सरकारी विभागों में 'फाइलें गुम होना' अक्सर किसी बड़े सच को दफन करने का पुराना तरीका माना जाता है। लेकिन जब मामला 118 परिवारों के भविष्य और सरकारी खजाने से जुड़ी नियुक्तियों का हो, तो यह 'गुमशुदगी' सीधे तौर पर सिस्टम की नीयत पर सवाल खड़ा करती है। अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2012 में हुई संविदा भर्तियों का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
क्या है पूरा प्रकरण?
मामला वर्ष 2012 का है, जब अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 30 डॉक्टरों सहित कुल 118 पदों पर संविदा कर्मियों की भर्ती की गई थी। सरकारी नियमावली के अनुसार, ऐसी नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी करना, इंटरव्यू बोर्ड का गठन और चयन मेरिट की फाइलों का सुरक्षित होना अनिवार्य है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब इन भर्तियों की पारदर्शिता पर आरटीआई (RTI) के जरिए जवाब मांगा गया, तो विभाग ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया— "रिकॉर्ड गायब है!"
अजीबोगरीब दलील: शिफ्टिंग में खो गए दस्तावेज
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय की ओर से तर्क दिया गया है कि वर्ष 2015 में जब कार्यालय की शिफ्टिंग हुई थी, उसी दौरान ये महत्वपूर्ण दस्तावेज संभवतः नष्ट हो गए या खो गए। सवाल यह उठता है कि क्या 118 लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया इतनी मामूली थी कि उसे रद्दी समझकर छोड़ दिया गया? आखिर इन दस्तावेजों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और बाबुओं पर अब तक जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?
सूचना आयोग की सख्ती के बाद भी विभाग 'मौन'
यह मामला राज्य सूचना आयोग की चौखट तक भी पहुँचा। आयोग ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए धारा 20 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी। लेकिन हकीकत यह है कि एक साल से अधिक का समय बीत जाने और दर्जनों पेशियों के बावजूद, न तो वह 'खोया' हुआ रिकॉर्ड मिला और न ही किसी दोषी पर गाज गिरी।
सिस्टम से 'अटल सत्य' टीवी न्यूज़ 24 के कुछ चुभते सवाल:
विज्ञापन का रहस्य: यदि नियुक्तियां निष्पक्ष थीं, तो वह विज्ञापन कहाँ है जो अखबारों में जारी किया गया था?
चयन प्रक्रिया: इंटरव्यू बोर्ड में कौन-कौन शामिल था और किस मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन हुआ?
दबाव की राजनीति: पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आखिर विभाग किसे बचाने की कोशिश कर रहा है?
निष्कर्ष
फाइलों का 'लापता' होना अक्सर इस बात का संकेत होता है कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ ऐसा है जिसे सामने आने से रोका जा रहा है। अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की यह खामोशी चीख-चीखकर कह रही है कि शायद नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को रेवड़ियां बांटी गई थीं।
अब देखना यह होगा कि क्या उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्रालय और शासन इस मामले का संज्ञान लेकर उन 118 नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराएगा, जिनकी फाइलें वर्तमान में 'साजिश के मलबे' में दबी नजर आ रही हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट: दीपक भारद्वाज अलीगढ़।


इंदौर में सामाजिक सरोकार: कैंसर उपचार के लिए आधुनिक उपकरण और संस्थान को मिली सौर ऊर्जा की सौगात।

इंदौर में सामाजिक दायित्व की सराहनीय पहल, कैंसर उपचार और हरित ऊर्जा को मिला संबल

इंदौर। सामाजिक दायित्व के अंतर्गत एक प्रेरणादायी पहल में दो प्रमुख औद्योगिक संस्थानों ने इंदौर कैंसर फाउंडेशन को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। इस संपूर्ण पहल को साकार करने में रोटरी क्लब ऑफ इंदौर प्रोफेशनल्स की अहम भूमिका रही। क्लब के अध्यक्ष रोटेरियन भानु तापड़िया के विशेष प्रयासों से यह सहयोग संभव हो सका।
इंदौर स्थित सोनिक बायोकेम निष्कर्षण द्वारा 21.05 लाख रुपये की राशि दान स्वरूप प्रदान की गई है। इस राशि का उपयोग इंदौर कैंसर फाउंडेशन के प्रमुख प्रकल्प ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी’ में कैंसर उपचार हेतु दूसरे आधुनिक शल्य कक्ष के लिए आवश्यक उन्नत चिकित्सा उपकरणों की खरीद में किया जाएगा। यह सुविधा रोगियों को बेहतर और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
वहीं, देवास स्थित बेयरलोचर इंडिया एडिटिव्स द्वारा संस्थान में 50 किलोवॉट क्षमता का छत पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इस सौर संयंत्र का शुभारंभ शुक्रवार, 24 अप्रैल को मुख्य अतिथि रोटरी मंडल 3040 के प्रांतपाल रोटेरियन सुशील मल्होत्रा द्वारा किया गया। इस परियोजना से संस्थान के विद्युत व्यय में उल्लेखनीय कमी आने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह संपूर्ण कार्य Rotary District 3040 के अंतर्गत संपन्न किया गया, जिसमें क्लब के सचिव रोटेरियन सुनील अत्री एवं मंडल रोटरी फाउंडेशन अध्यक्ष रोटेरियन नितिन दाफरिया का भी विशेष योगदान रहा। रोटरी मंडल 3040 के जनछवि अध्यक्ष घनश्याम सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रोटेरियन सदस्य, शहर के प्रतिष्ठित नागरिक, डॉ. धारकर, कैंसर फाउंडेशन के ट्रस्टीगण, चिकित्सक एवं सहयोगी चिकित्सा कर्मी उपस्थित रहे।
इंदौर कैंसर फाउंडेशन ने दोनों दानदाताओं के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा जरूरतमंद रोगियों को सुलभ और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
अटल सत्य टी वी न्यूज 24 के लिए अजय बियानी की रिपोर्ट इंदौर 

लखनऊ के डॉ. ए. के. त्रिपाठी को ब्रिटिश पार्लियामेंट और ऑक्सफोर्ड में अंतरराष्ट्रीय सम्मान।


लखनऊ के डॉ. ए. के. त्रिपाठी को ब्रिटिश पार्लियामेंट और ऑक्सफोर्ड में अंतरराष्ट्रीय सम्मान
लखनऊ | ब्यूरो रिपोर्ट
राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए. के. त्रिपाठी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें 10 अप्रैल 2026 को ब्रिटिश पार्लियामेंट में तथा 12 अप्रैल 2026 को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में सम्मानित किया गया।
इस सम्मान समारोह के दौरान डॉ. त्रिपाठी ने अपने शोध कार्यों और शोधपत्रों को प्रस्तुत करते हुए वेट लॉस, पेट संबंधी रोग, किडनी डायलिसिस, पथरी, इनफर्टिलिटी, ऑटिज्म, त्वचा एवं मानसिक रोगों जैसे जटिल विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की।
11 अप्रैल को नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में आयोजित विशेष कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर इयोन मोर्गन, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोनाथन ट्रॉट और डेविड गोवर की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया गया।
होम्योपैथी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला यह सम्मान उनके लंबे अनुभव और सेवा कार्यों का प्रमाण माना जा रहा है। डॉ. त्रिपाठी डॉ. हैनीमैन चेरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से अब तक 3000 से अधिक निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित कर चुके हैं, जिससे हजारों मरीज लाभान्वित हुए हैं।
यह उपलब्धि न केवल डॉ. त्रिपाठी के लिए, बल्कि लखनऊ और देश के लिए भी गर्व का विषय है।

के जे एम यू के डाक्टरों की लापरवाही का आरोप एक पत्रकार के पिता की मौत।

“इलाज या इंतज़ार? केजीएमयू में फिर उठे लापरवाही के सवाल”
लखनऊ।
राजधानी के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान King George's Medical University (केजीएमयू) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि एक पत्रकार के परिवार से जुड़ा है—और आरोप इतने गंभीर हैं कि सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार गीतांजलि सिंह के पिता दुर्गा प्रसाद को गंभीर हालत में केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि मरीज लगातार तीन दिनों तक ब्लीडिंग से जूझता रहा, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ ने समय रहते न तो समुचित उपचार किया और न ही स्थिति की गंभीरता को प्राथमिकता दी।
परिवार का कहना है कि उन्होंने बार-बार अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों को मरीज की बिगड़ती हालत से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला—कार्रवाई नहीं। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में अब मरीज की जान से ज्यादा “प्रोटोकॉल” अहम हो गया है?
लगातार खून बहने के कारण दुर्गा प्रसाद की हालत बिगड़ती गई और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का साफ कहना है—“अगर समय पर इलाज मिलता, तो आज वो हमारे बीच होते।”
यह कोई पहली घटना नहीं है जब केजीएमयू पर लापरवाही के आरोप लगे हों। लेकिन हर बार जांच के नाम पर फाइलें दब जाती हैं और जिम्मेदार लोग बच निकलते हैं। आखिर कब तक मरीजों की जान यूं ही जाती रहेगी?
पत्रकार गीतांजलि सिंह इस समय गहरे शोक और पीड़ा में हैं, लेकिन उनका दर्द सिर्फ निजी नहीं—यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो “जीवन रक्षक” होने का दावा करती है।
परिजनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या फिर यह भी “एक और खबर” बनकर रह जाएगी।
अटल सत्य सवाल उठाता है:
👉 क्या केजीएमयू में मरीज सुरक्षित हैं?
👉 क्या लापरवाही पर कोई जिम्मेदारी तय होगी?
👉 या फिर सिस्टम यूं ही “मौन” बना रहेगा?
(अटल सत्य टी वी न्यूज 24 — सच जो चुभे, वही असली खबर)

ब्रेकिंग अयोध्या प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत अस्पताल पर लापरवाही के लगे आरोप।

अयोध्या में प्राइवेट हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप, प्रसव के दौरान महिला और नवजात की मौत
अयोध्या। जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बेनीगंज निवासी सुरेश यादव की पत्नी सोनी यादव की प्रसव के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना में नवजात शिशु भी जीवित नहीं बच सका।
परिजनों के मुताबिक, दिन में अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टर ने माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ बताया था। लेकिन देर रात जब सोनी यादव को प्रसव के लिए लेबर रूम में ले जाया गया, तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। आरोप है कि फोन करने पर डॉक्टर ने नर्स और दाई के भरोसे डिलीवरी कराने को कह दिया।
परिवार का कहना है कि उचित चिकित्सा सुविधा और डॉक्टर की मौजूदगी न होने के कारण हालात बिगड़ते चले गए और अंततः माँ और नवजात दोनों की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है।
यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध के रूप में देखा जा रहा है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल इस घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
(गोंडा से ब्यूरो रिपोर्ट: शिव शरण, अटल सत्य टीवी न्यूज 24)

लखनऊ मेदांता से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर।

मेदांता कैंसर समिट 2026 में आधुनिक उपचार पद्धतियों पर मंथन
लखनऊ, 29 मार्च 2026।
मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ द्वारा आयोजित मेदांता कैंसर समिट 2026 का सफल आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कैंसर उपचार के हर पहलू पर विस्तृत चर्चा की। इस समिट में जनरल सर्जरी, ब्रेस्ट सर्जरी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, गाइनकोलॉजी, ईएनटी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और पीडियाट्रिक्स सहित कई विभागों के चिकित्सकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मेदांता लखनऊ के एमडी डॉ. राकेश कपूर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कैंसर उपचार में तेजी से हो रहे बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब “वन-साइज-फिट्स-ऑल” की जगह प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत और सटीक उपचार (प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी) की दिशा में चिकित्सा विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ऐसे मंचों को ज्ञान साझा करने और बेहतर उपचार रणनीतियां विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
समिट के दौरान कैंसर जागरूकता पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें कैंसर के कारण, पहचान, उपचार और बचाव के उपायों को सरल भाषा में समझाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मेडिकल ऑन्कोलॉजी सत्र से हुई, जिसमें प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी यानी व्यक्तिगत उपचार पद्धति पर चर्चा की गई। इसके बाद रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सत्र में कैंसर उपचार में रेडिएशन की भूमिका और उपयोगिता को विस्तार से समझाया गया। हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी सत्र में ओरल कैंसर की समय पर पहचान और उपचार की प्रक्रिया पर जोर दिया गया।
ब्रेस्ट कैंसर सत्र में वर्तमान और भविष्य की उपचार पद्धतियों पर चर्चा हुई, जबकि हीमेटो-ऑन्कोलॉजी सत्र में एक्यूट ल्यूकेमिया के प्रबंधन और आधुनिक CAR-T सेल थेरेपी जैसे उन्नत इलाजों पर विचार साझा किए गए। जीआई कैंसर सत्र में जटिल सर्जरी और रोबोटिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
लंग कैंसर और यूरोजेनिटल कैंसर सत्रों में नए उपचार विकल्पों और रोबोटिक सर्जरी के लाभों पर चर्चा की गई। वहीं समिट के अंतिम सत्र में सर्वाइकल कैंसर में रेडिएशन थेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तार से बताया गया।
समिट के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समय पर जांच, जागरूकता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कैंसर का प्रभावी उपचार संभव है।
अटल सत्य टी वी न्यूज 24 के लिए विजय गुप्ता की रिपोर्ट लखनऊ।

यू पी में पहली बार की होल सर्जरी चार वर्षिणी बच्चे को मिली नई जिंदगी।

अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24
निष्पक्ष खबरों का संग्रह
यूपी में पहली ‘कीहोल’ हार्ट सर्जरी, चार साल के बच्चे को नई जिंदगी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए चार वर्षीय बच्चे की जटिल हार्ट सर्जरी ‘कीहोल’ तकनीक से सफलतापूर्वक पूरी की है। यह उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला मामला है, जहां बिना छाती की हड्डी काटे बेहद छोटे चीरे के माध्यम से दिल के छेद को बंद किया गया।
जानकारी के अनुसार, बच्चा लंबे समय से बार-बार फेफड़ों के संक्रमण और सांस लेने में परेशानी से जूझ रहा था। जांच में उसके दिल में छेद (हार्ट डिफेक्ट) की पुष्टि हुई। सामान्यत: ऐसे मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, जिसमें छाती पर बड़ा चीरा लगाना पड़ता है और मरीज को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना होता है।
लेकिन इस बार अपोलोमेडिक्स के विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (कीहोल तकनीक) का इस्तेमाल करते हुए महज लगभग 3 सेंटीमीटर के छोटे चीरे से पूरी सर्जरी को अंजाम दिया। यह चीरा बच्चे के कंधे के नीचे बगल के हिस्से में लगाया गया, जिससे हड्डी या मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाए बिना ऑपरेशन किया गया।
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने वाले कार्डियक सर्जन डॉ. राहुल भूषण ने बताया कि छोटे बच्चों में इस प्रकार की सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उनका हृदय आकार में बहुत छोटा होता है। उन्होंने इस तकनीक का विशेष प्रशिक्षण सिंगापुर के नेशनल हार्ट सेंटर से प्राप्त किया है।
उन्होंने बताया कि सर्जरी के दौरान बच्चे के दिल को बायपास मशीन से जोड़ा गया और उसी छोटे चीरे के माध्यम से दिल के छेद को बंद किया गया। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से काफी कठिन होती है, क्योंकि छोटे बच्चों में रक्त वाहिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं।
करीब तीन घंटे चली इस सर्जरी के बाद बच्चे को केवल एक दिन आईसीयू में रखा गया और दो दिन के भीतर ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। नई तकनीक की वजह से न केवल रक्तस्राव कम हुआ, बल्कि रिकवरी भी बेहद तेज रही।
अस्पताल के सीईओ और एमडी डॉ. मयंक सोमानी ने इसे प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उत्तर प्रदेश में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बड़े शहरों या विदेश जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
डॉक्टरों के अनुसार, सर्जरी के बाद बच्चे का दिल पूरी तरह सामान्य रूप से कार्य कर रहा है और वह अब स्वस्थ जीवन जी सकेगा। इस तकनीक के जरिए भविष्य में बच्चों की जटिल हृदय सर्जरी और अधिक सुरक्षित व प्रभावी हो सकेगी।
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मेदांता लखनऊ में जटिल सर्जरी सफ़ल

हेडलाइन:
मेदांता लखनऊ में जटिल सर्जरी सफल, गर्दन के स्कार कॉन्ट्रैक्चर से पीड़ित मासूम को मिली नई जिंदगी
लखनऊ, 17 मार्च 2026:
राजधानी लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक मासूम बच्चे की जटिल सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है। गर्दन के पीछे बने गंभीर स्कार कॉन्ट्रैक्चर से पीड़ित यह बच्चा अब सामान्य रूप से सिर सीधा रखकर अपने माता-पिता की आँखों में देख पा रहा है।
कुछ समय पहले जब परिजन बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे, तो पहली नजर में वह सामान्य दिख रहा था, लेकिन वह लगातार ऊपर की ओर देख रहा था और गर्दन झुकाने में पूरी तरह असमर्थ था। इस समस्या के कारण वह अपने माता-पिता से आंख मिलाकर बात तक नहीं कर पा रहा था।
अस्पताल के प्लास्टिक, एस्थेटिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. निखिल पुरी और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशीष विलास यूकेई की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
डॉ. निखिल पुरी के अनुसार, बच्चे की गर्दन के पीछे गंभीर स्कार कॉन्ट्रैक्चर बन गया था, जो कुछ महीने पहले हुए संक्रमण के कारण विकसित हुआ। घाव तो भर गया, लेकिन त्वचा सख्त होकर सिकुड़ गई और गर्दन को पीछे की ओर खींचने लगी, जिससे बच्चा सिर आगे नहीं झुका पा रहा था।
सर्जरी से पहले बच्चे की सेहत सुधारना जरूरी था, क्योंकि वह कुपोषण का शिकार था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से जटिल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान जकड़ी हुई त्वचा को ढीला किया गया, जरूरत पड़ने पर आसपास की त्वचा को खिसकाकर और शरीर के अन्य हिस्सों से त्वचा लेकर प्रभावित हिस्से को कवर किया गया।
विशेष बात यह रही कि ऑपरेशन के दौरान न तो अधिक रक्तस्राव हुआ और न ही ट्रेकियोस्टॉमी जैसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ी। सर्जरी के बाद बच्चे को आईसीयू में निगरानी में रखा गया और धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार होता गया।
करीब एक महीने के इलाज के बाद बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह सामान्य रूप से सामने देख सकता है और उसके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलकता है।
यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि उस परिवार के लिए नई उम्मीद और खुशियों की शुरुआत भी है, जो लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहा था।
अटल सत्य टी वी न्यूज 24
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लखनऊ से विजय गुप्ता की रिपोर्ट