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लखनऊ: सरकारी अस्पतालों में दबंगई का बोलबाला, गर्भवती महिला और परिजनों से बदसलूकी; स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल

लखनऊ | रिपोर्ट: अटल बिहारी शर्मा

​उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत दावों से उलट नजर आ रही है। एक ओर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार औचक निरीक्षण और कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में तैनात सुरक्षाकर्मी मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। ताजा मामला लखनऊ के अहिमामऊ स्थित मातृ शिशु केंद्र से सामने आया है, जहाँ मानवता को शर्मसार करने वाली घटना घटी है।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला अपने परिजनों के साथ नियमित जांच (Routine Check-up) के लिए अहिमामऊ मातृ शिशु केंद्र पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात सुरक्षा गार्डों ने सहयोग करने के बजाय सीधे बदतमीजी शुरू कर दी। बात इतनी बढ़ गई कि सुरक्षाकर्मी 'दबंगई' पर उतर आए और परिजनों के साथ न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि मारपीट करने पर भी आमादा हो गए।

"हम यहाँ इलाज कराने आए हैं या अपमान सहने? अगर गर्भवती महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो आम जनता कहाँ जाएगी?" — घटना के दौरान एक आक्रोशित तीमारदार का बयान।


अस्पताल बना 'अखाड़ा', मरीजों में भारी नाराजगी

​इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। मौके पर मौजूद अन्य मरीजों और तीमारदारों ने भी सुरक्षा गार्डों की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; लखनऊ के कई सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा गार्ड खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं और मरीजों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री की सख्ती के बावजूद ढाक के तीन पात

​गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक लगातार अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं और लापरवाह डॉक्टरों व कर्मचारियों पर गाज गिरा रहे हैं। इसके बावजूद, निचले स्तर पर व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। दलाली, लापरवाही और अब सुरक्षाकर्मियों की गुंडागर्दी ने सरकारी अस्पतालों की छवि को धूमिल कर दिया है।

जनता की प्रमुख मांगें और सवाल:

​इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • दोषियों पर कार्रवाई: मामले की निष्पक्ष जांच कर बदसलूकी करने वाले गार्डों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
  • CCTV की जांच: अस्पताल में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
  • सुरक्षा कर्मियों की समीक्षा: अस्पतालों में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों और उनके कर्मियों के व्यवहार की समीक्षा हो।
  • सम्मानजनक व्यवहार: यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी गर्भवती महिला या मरीज के साथ ऐसी घटना न हो।

निष्कर्ष:

राजधानी के अस्पतालों में यदि गर्भवती महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

अटल सत्य टी वी न्यूज 24 के लिए, लखनऊ से अटल बिहारी शर्मा की रिपोर्ट।

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