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लखनऊ: डीसीपी पश्चिम का सख्त निर्देश, लंबित मामलों का हो जल्द निस्तारण

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इंदौर में रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 का दो दिवसीय शिक्षण सेमिनार संपन्न, सैकड़ों रोटेरियन्स ने लिया प्रशिक्षण।

इंदौर: रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 का समेकित शिक्षण सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न अजय बियानी की रिपोर्ट, इंदौर। रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 ...

इंदौर में रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 का दो दिवसीय शिक्षण सेमिनार संपन्न, सैकड़ों रोटेरियन्स ने लिया प्रशिक्षण।

इंदौर: रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 का समेकित शिक्षण सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न
अजय बियानी की रिपोर्ट, इंदौर।
रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 द्वारा आयोजित दो दिवसीय समेकित शिक्षण सेमिनार इंदौर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 2 एवं 3 मई को आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र 4, 5 एवं 6 के सैकड़ों रोटेरियन्स, क्लब अध्यक्षों, सचिवों, सहायक गवर्नरों एवं जिला पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य आगामी रोटरी वर्ष 2026-27 के लिए नेतृत्व को प्रशिक्षित, प्रेरित और सशक्त बनाना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ सार्जेंट एट आर्म्स रोटेरियन विनीत सहाय द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन रोटेरियन राजीव टुटेजा ने दिया, जबकि कार्यक्रम की रूपरेखा एवं अतिथि परिचय रोटेरियन रोहित नेमा ने प्रस्तुत किया। आयोजन के उद्देश्य पर डिस्ट्रिक्ट लर्निंग फैसिलिटेटर रोटेरियन धीरन दत्ता ने प्रकाश डाला।
डीईपीसी रोटेरियन राजेश मोदी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 2026-27 रोटेरियन संस्कार कोठारी का परिचय कराया। इस दौरान रोटेरियन संस्कार कोठारी ने अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए “विद्या निधि” की रूपरेखा साझा की। मुख्य अतिथि डीजीई अनु नारंग का परिचय रोटेरियन अर्चना चांदक ने कराया, जिसके बाद उन्होंने विविधता, समानता एवं समावेशन विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया।
डिस्ट्रिक्ट पब्लिक इमेज चेयरपर्सन घनश्याम सिंह के अनुसार सेमिनार के विभिन्न सत्रों में अनुभवी वक्ताओं ने सेवा परियोजनाओं, नेतृत्व निर्माण, सदस्यता विकास, फाउंडेशन, वैश्विक अनुदान, सामाजिक दायित्व एवं स्थायी परियोजनाओं पर व्यावहारिक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी दी। विशेष रूप से फाउंडेशन एवं अनुदान प्रबंधन से जुड़े सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुए।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए आगामी रोटरी वर्ष में अधिक प्रभावी और संगठित कार्य करने का संकल्प लिया। यह आयोजन सेवा के मूल मंत्र को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज के प्रेसिडेंट डॉ. आर.के. सिंह ने 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' का किया स्वागत; बताया शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति।


लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज के प्रेसिडेंट डॉ. आर.के. सिंह ने 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' का किया स्वागत; बताया शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति
लखनऊ | अटल सत्य टी वी न्यूज 24 रिपोर्ट अटल बिहारी शर्मा।
दिनांक: 26 अप्रैल, 2026
लखनऊ: राजधानी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज (गोलागंज) के प्रेसिडेंट/मैनेजर डॉ. आर.के. सिंह ने देश की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बड़े बदलावों पर अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की है। डॉ. सिंह ने भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' (BSB) को शिक्षा जगत के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
CBSE और ICSE की तर्ज पर अब 'भारतीय शिक्षा बोर्ड'
डॉ. आर.के. सिंह ने अपने संदेश में कहा कि जिस प्रकार देश में अभी तक CBSE (केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) और ICSE जैसे बोर्ड कार्यरत हैं, ठीक उसी तर्ज पर भारत सरकार ने अब 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' को मान्यता प्रदान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए बोर्ड का उद्देश्य भारतीय मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय करना है।
कम खर्चे में विश्वस्तरीय शिक्षा का विकल्प
डॉ. सिंह ने इस बोर्ड की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' न केवल शैक्षणिक रूप से सशक्त है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी आम जनता के अनुकूल है। उन्होंने जानकारी दी:
समान स्तर: यह बोर्ड पूरी तरह से CBSE के समकक्ष (Equal) है।
किफायती शुल्क: जहाँ अन्य बोर्डों का पंजीकरण शुल्क अधिक होता है, वहीं भारतीय शिक्षा बोर्ड का रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र ₹2,000 के लगभग है।
सत्र की शुरुआत: इस नए बोर्ड की प्रक्रियाएँ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं और आगामी 11 महीनों के भीतर यह पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
28 अप्रैल को होगा ऐतिहासिक उद्घाटन
डॉ. आर.के. सिंह ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का भव्य उद्घाटन आगामी 28 अप्रैल, 2026 को होने जा रहा है। उन्होंने इसे भारतीय शिक्षा के भविष्य के लिए एक 'निश्चित और स्वर्णिम' कदम बताया।
"भारतीय शिक्षा बोर्ड का आगमन देश की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देगा। यह न केवल भारतीय संस्कृति को सहेजेगा बल्कि छात्रों को कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा भी प्रदान करेगा।" > — डॉ. आर.के. सिंह, प्रेसिडेंट/मैनेजर, लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज
शिक्षा जगत में उत्साह की लहर
लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज जैसे बड़े संस्थान द्वारा इस बोर्ड का समर्थन किए जाने से शिक्षाविदों और अभिभावकों के बीच सकारात्मक संदेश गया है। डॉ. सिंह ने इस अभिनव पहल के लिए 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' की पूरी टीम को हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं।
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विशेष रिपोर्ट: बिहार में BPSC अभ्यर्थियों से अवैध वसूली? ‘आयरन लेडी’ रीना सिंह ने सिस्टम को घेरा


विशेष रिपोर्ट: बिहार में BPSC अभ्यर्थियों से अवैध वसूली? ‘आयरन लेडी’ रीना सिंह ने सिस्टम को घेरा
पटना | अटल सत्य टीवी न्यूज 24
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की चुनौती के साथ-साथ अब 'सिस्टम की अव्यवस्था' भी एक बड़ी मुसीबत बन गई है। परीक्षा केंद्रों पर बैग और मोबाइल रखने की उचित व्यवस्था न होने के कारण छात्रों को आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्हें जनता ‘आयरन लेडी’ के नाम से जानती है, रीना सिंह ने मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार के विभिन्न जिलों में आयोजित हो रही PCS परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों ने शिकायत की है कि परीक्षा केंद्रों के भीतर सामान रखने की कोई व्यवस्था नहीं दी जा रही है। मजबूरन छात्रों को अपना कीमती सामान केंद्र के बाहर निजी दुकानों या ठेलों पर जमा करना पड़ रहा है।
अवैध वसूली: बाहर की दुकानों पर प्रति बैग ₹20 से ₹30 तक वसूले जा रहे हैं।
सुरक्षा का अभाव: पैसे देने के बावजूद सामान की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती।
छात्रों का शोषण: दूर-दराज से आने वाले गरीब छात्रों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
रीना सिंह के कड़े प्रहार: "यह सांठगांठ का खेल है"
इस अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए रीना सिंह ने प्रशासन और केंद्र अधीक्षकों को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है।
"BPSC की स्पष्ट गाइडलाइन है कि अभ्यर्थियों के सामान की सुरक्षा और क्लॉक रूम की व्यवस्था करना केंद्र अधीक्षक की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद स्कूलों द्वारा व्यवस्था न करना यह दर्शाता है कि स्थानीय दुकानदारों के साथ मिलकर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।" — रीना सिंह
उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि यदि एक केंद्र पर औसतन 500 छात्र भी आते हैं, तो एक शिफ्ट में करीब ₹15,000 की अवैध कमाई की जा रही है। पूरे राज्य के केंद्रों को मिलाया जाए तो यह आंकड़ा लाखों में पहुँचता है।
प्रमुख माँगें और प्रशासन को चेतावनी
‘आयरन लेडी’ ने सरकार और जिला प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
निशुल्क क्लॉक रूम: हर परीक्षा केंद्र के भीतर छात्रों के लिए मुफ्त और सुरक्षित स्टोरेज की व्यवस्था हो।
दोषियों पर कार्रवाई: जिन केंद्रों ने गाइडलाइन का उल्लंघन किया है, उन स्कूल प्रशासनों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।
पारदर्शिता: आगामी परीक्षाओं में एडमिट कार्ड के साथ ही सामान रखने की व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख हो।
निष्कर्ष: कब सुधरेगा सिस्टम?
रीना सिंह की इस आवाज़ ने अभ्यर्थियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है, लेकिन सवाल वही है— क्या बिहार का प्रशासनिक अमला इस जमीनी हकीकत पर संज्ञान लेगा? क्या भविष्य में छात्रों को इन छोटी-छोटी लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाली समस्याओं से मुक्ति मिलेगी?
ब्यूरो रिपोर्ट, अटल सत्य टीवी न्यूज 24

निजी स्कूल पर मनमानी फीस वसूली और छात्र को बाहर निकालने का आरोप, अभिभावक ने लगाई गुहार।

 अटल सत्य टीवी न्यूज 24 | विशेष रिपोर्ट
निजी स्कूल पर मनमानी फीस वसूली और छात्र को बाहर निकालने का आरोप, अभिभावक ने लगाई गुहार
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक निजी विद्यालय के प्रबंधन पर दबंगई दिखाते हुए निशुल्क शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। पीड़ित अभिभावक ने लिखित प्रार्थना पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से न्याय की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अभिभावक के अनुसार उनके बच्चे का प्रवेश सरकारी कोटे (RTE) के तहत विद्यालय में हुआ था, जिसके अंतर्गत शिक्षा पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए। लेकिन विद्यालय प्रबंधन द्वारा बच्चे से फीस की मांग की जा रही थी। जब अभिभावक फीस देने में असमर्थ रहे, तो बच्चे को स्कूल से बाहर कर दिया गया।
 अभिभावक का आरोप
प्रार्थना पत्र में अभिभावक ने बताया कि:
स्कूल प्रशासन बार-बार फीस जमा करने का दबाव बना रहा था
मना करने पर बच्चे को कक्षा से बाहर कर दिया गया
शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई
कई बार स्कूल जाकर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया
 गंभीर सवाल
यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है:
क्या निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का पालन कर रहे हैं?
क्या गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है?
क्या शिक्षा विभाग ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, RTE के तहत चयनित बच्चों से फीस लेना नियमों के खिलाफ है और ऐसा करने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। 
The Times of India
 RTI और शिकायत का सहारा
अभिभावक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी जानकारी मांगी है और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। RTI कानून नागरिकों को सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने का अधिकार देता है। 
शिक्षा मंत्रालय
 प्रशासन से मांग
पीड़ित अभिभावक ने प्रशासन से मांग की है कि:
बच्चे को पुनः स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए
स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जाए
निष्कर्ष
लखनऊ का यह मामला शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
 अटल सत्य टीवी न्यूज 24
निष्पक्ष खबरों का संग्रह 
अटल बिहारी शर्मा की ख़ास रिपोर्ट लखनऊ।

ज्ञानदीप पब्लिक इंटर कॉलेज शिवपुरम का शानदार रिजल्ट, हाई स्कूल व इंटर में छात्रों ने लहराया परचम।


 ज्ञानदीप पब्लिक इंटर कॉलेज शिवपुरम के विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन, हाई स्कूल व इंटर में लहराया परचम
लखनऊ: Lucknow के राजाजीपुरम क्षेत्र स्थित ज्ञानदीप पब्लिक इंटर कॉलेज, शिवपुरम के छात्र-छात्राओं ने इस वर्ष यूपी बोर्ड हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया है।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत और लगन के बल पर शानदार अंक हासिल किए, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
 इंटरमीडिएट में शानदार प्रदर्शन
इंटरमीडिएट परीक्षा में विशेष द्विवेदी ने 78% अंक प्राप्त किए। किरण ने 76%, दिव्यांशी अवस्थी ने 75.5%, प्राची सिंह ने 75% अंक हासिल किए। वहीं परी दुबे और यस कनौजिया ने 70-70% अंक प्राप्त कर बेहतरीन प्रदर्शन किया।
 हाई स्कूल में छात्राओं का दबदबा
हाई स्कूल परिणाम में सोनिया कौशल ने 85% अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया। दिव्या गौतम ने 81%, ज्योति मिश्रा ने 80%, प्रिया वर्मा ने 79%, ज्योति निषाद ने 76% और वंशिका सिंह ने 74% अंक प्राप्त किए।
 मेहनत और अनुशासन का परिणाम
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इन छात्रों ने लगातार मेहनत, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति समर्पण दिखाया, जिसका परिणाम शानदार सफलता के रूप में सामने आया।
शिक्षकों ने इस उपलब्धि का श्रेय विद्यार्थियों की मेहनत और अभिभावकों के सहयोग को दिया।
 यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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ब्रेकिंग खबर शिक्षा से जुड़ी है पढ़िए अटल सत्य टी वी न्यूज 24 पर।

अटल सत्य टीवी न्यूज 24
विशेष रिपोर्ट दीपक भारद्वाज| अतरौली/अलीगढ़
एनसीईआरटी किताबों का संकट: दावों के बीच जमीनी हकीकत अलग, अभिभावक परेशान
नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ अतरौली और अलीगढ़ क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। बाजारों में एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बाजार में नहीं मिल रहीं पूरी किताबें
अभिभावकों का कहना है कि कई दिनों से वे बच्चों के लिए एनसीईआरटी की किताबें तलाश कर रहे हैं, लेकिन पूरी सेट कहीं उपलब्ध नहीं है। कुछ दुकानों पर सीमित किताबें मिल रही हैं, जिससे पढ़ाई शुरू होने से पहले ही मुश्किलें बढ़ गई हैं।
निजी किताबों के लिए दबाव के आरोप
इसी बीच कई निजी स्कूलों द्वारा दी गई पुस्तक सूची में महंगी प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें शामिल किए जाने की बात सामने आई है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन इन पुस्तकों को खरीदने के लिए दबाव बना रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
कमीशनखोरी की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्कूलों और प्रकाशकों के बीच तालमेल के कारण यह स्थिति बनी है। उनका आरोप है कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफे को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आम परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
आपूर्ति में देरी बनी वजह
पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार इस बार किताबों की सप्लाई समय पर नहीं पहुंच पाई, जिसके कारण बाजार में कमी बनी हुई है। मांग ज्यादा होने से समस्या और बढ़ गई है।
विभाग का दावा, जमीनी असर का इंतजार
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही एनसीईआरटी किताबों की उपलब्धता सामान्य कर दी जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्कूल को निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य करने की अनुमति नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
अभिभावकों की मांग
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
निष्कर्ष:
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर संसाधनों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। फिलहाल अतरौली और अलीगढ़ में स्थिति यह संकेत दे रही है कि व्यवस्था और क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है, जिसका सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर पड़ रहा है।

इंदौर से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां बिचौली मर्दाना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने इस वर्ष परीक्षा परिणाम में शानदार प्रदर्शन कर सफलता का नया इतिहास रच दिया है।।


 रिपोर्ट: अजय बियानी, इंदौर
इंदौर से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां बिचौली मर्दाना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने इस वर्ष परीक्षा परिणाम में शानदार प्रदर्शन कर सफलता का नया इतिहास रच दिया है।
विशेष रूप से जीवन उमंग आदिवासी छात्रावास की बालिकाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण से यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।
बारहवीं कक्षा गणित संकाय में रितु चौहान ने 85 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं अर्मिला सोलंकी ने 84 प्रतिशत के साथ द्वितीय स्थान पाया। कला संकाय में सोनू बामनिया ने 81 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि जीव विज्ञान में काजल ठकराव ने 80.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
वहीं दसवीं कक्षा में भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया। सोनू भूरिया ने 85.8 प्रतिशत के साथ प्रथम स्थान, सुमित्रा बरडे ने 85.6 प्रतिशत के साथ द्वितीय स्थान और आशा राठौर ने 85.4 प्रतिशत अंक के साथ तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा रेखा सोलंकी ने 81.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
बताया जा रहा है कि इन सभी बालिकाओं को जीवन उमंग आदिवासी छात्रावास में निःशुल्क आवास, भोजन, वस्त्र और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा दी जाती है, जिसका संचालन सेवा भारती द्वारा किया जाता है।
इन छात्राओं की सफलता उनके अनुशासन, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम का परिणाम है। कोई कलेक्टर बनने का सपना देख रही है, तो कोई वकील बनकर न्याय की राह पर चलना चाहती है।
यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
और यह संदेश देती है कि — शिक्षा ही सशक्त भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी है।

इंदौर में छात्र आदित्य मालाकार ने रचा इतिहास, 98% अंक लाकर बने स्कूल टॉपर।

इंदौर में छात्र आदित्य मालाकार ने रचा इतिहास, 98% अंक लाकर बने स्कूल टॉपर
इंदौर (निपानिया)। अटल सत्य टीवी न्यूज 24 के लिए अजय बियानी की खास रिपोर्ट—समर पार्क निवासी मेधावी छात्र आदित्य मालाकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10वीं परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। एसआईसीए विद्यालय, निपानिया के टॉपर बनकर आदित्य ने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र और स्कूल का नाम गौरवान्वित किया है।
आदित्य, पिता जगदीश मालाकार के पुत्र हैं और शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वे क्षत्रशाल नगर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं और बाल समूह के नायक के रूप में नेतृत्व क्षमता भी दिखा चुके हैं। उनकी सफलता अनुशासन, कड़ी मेहनत और समय प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है।
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने आदित्य की इस उपलब्धि को उनकी निरंतर मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम बताया है। शिक्षकों के अनुसार आदित्य शुरू से ही जिज्ञासु, अनुशासित और पढ़ाई के प्रति गंभीर छात्र रहे हैं, जिन्होंने नियमित अभ्यास के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
अपनी सफलता का श्रेय आदित्य ने अपने माता-पिता, गुरुजनों और मार्गदर्शकों को दिया। उनका कहना है कि सकारात्मक सोच, निरंतर अध्ययन और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। परिवारजनों और क्षेत्रवासियों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए आदित्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
यह सफलता उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।
: Indore News, CBSE 10th Result 2026, Aditya Malakar Topper, SICA School Nipania, 10th Topper Indore, Student Success Story, Education News India