विशेष रिपोर्ट दीपक भारद्वाज| अतरौली/अलीगढ़
एनसीईआरटी किताबों का संकट: दावों के बीच जमीनी हकीकत अलग, अभिभावक परेशान
नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ अतरौली और अलीगढ़ क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। बाजारों में एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बाजार में नहीं मिल रहीं पूरी किताबें
अभिभावकों का कहना है कि कई दिनों से वे बच्चों के लिए एनसीईआरटी की किताबें तलाश कर रहे हैं, लेकिन पूरी सेट कहीं उपलब्ध नहीं है। कुछ दुकानों पर सीमित किताबें मिल रही हैं, जिससे पढ़ाई शुरू होने से पहले ही मुश्किलें बढ़ गई हैं।
निजी किताबों के लिए दबाव के आरोप
इसी बीच कई निजी स्कूलों द्वारा दी गई पुस्तक सूची में महंगी प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें शामिल किए जाने की बात सामने आई है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन इन पुस्तकों को खरीदने के लिए दबाव बना रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्कूलों और प्रकाशकों के बीच तालमेल के कारण यह स्थिति बनी है। उनका आरोप है कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफे को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आम परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
आपूर्ति में देरी बनी वजह
पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार इस बार किताबों की सप्लाई समय पर नहीं पहुंच पाई, जिसके कारण बाजार में कमी बनी हुई है। मांग ज्यादा होने से समस्या और बढ़ गई है।
विभाग का दावा, जमीनी असर का इंतजार
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही एनसीईआरटी किताबों की उपलब्धता सामान्य कर दी जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्कूल को निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य करने की अनुमति नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
निष्कर्ष:
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर संसाधनों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। फिलहाल अतरौली और अलीगढ़ में स्थिति यह संकेत दे रही है कि व्यवस्था और क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है, जिसका सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर पड़ रहा है।



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