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विशेष रिपोर्ट: बिहार में BPSC अभ्यर्थियों से अवैध वसूली? ‘आयरन लेडी’ रीना सिंह ने सिस्टम को घेरा
पटना | अटल सत्य टीवी न्यूज 24
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की चुनौती के साथ-साथ अब 'सिस्टम की अव्यवस्था' भी एक बड़ी मुसीबत बन गई है। परीक्षा केंद्रों पर बैग और मोबाइल रखने की उचित व्यवस्था न होने के कारण छात्रों को आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्हें जनता ‘आयरन लेडी’ के नाम से जानती है, रीना सिंह ने मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार के विभिन्न जिलों में आयोजित हो रही PCS परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों ने शिकायत की है कि परीक्षा केंद्रों के भीतर सामान रखने की कोई व्यवस्था नहीं दी जा रही है। मजबूरन छात्रों को अपना कीमती सामान केंद्र के बाहर निजी दुकानों या ठेलों पर जमा करना पड़ रहा है।
अवैध वसूली: बाहर की दुकानों पर प्रति बैग ₹20 से ₹30 तक वसूले जा रहे हैं।
सुरक्षा का अभाव: पैसे देने के बावजूद सामान की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती।
छात्रों का शोषण: दूर-दराज से आने वाले गरीब छात्रों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
रीना सिंह के कड़े प्रहार: "यह सांठगांठ का खेल है"
इस अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए रीना सिंह ने प्रशासन और केंद्र अधीक्षकों को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है।
"BPSC की स्पष्ट गाइडलाइन है कि अभ्यर्थियों के सामान की सुरक्षा और क्लॉक रूम की व्यवस्था करना केंद्र अधीक्षक की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद स्कूलों द्वारा व्यवस्था न करना यह दर्शाता है कि स्थानीय दुकानदारों के साथ मिलकर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।" — रीना सिंह
उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि यदि एक केंद्र पर औसतन 500 छात्र भी आते हैं, तो एक शिफ्ट में करीब ₹15,000 की अवैध कमाई की जा रही है। पूरे राज्य के केंद्रों को मिलाया जाए तो यह आंकड़ा लाखों में पहुँचता है।
प्रमुख माँगें और प्रशासन को चेतावनी
‘आयरन लेडी’ ने सरकार और जिला प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
निशुल्क क्लॉक रूम: हर परीक्षा केंद्र के भीतर छात्रों के लिए मुफ्त और सुरक्षित स्टोरेज की व्यवस्था हो।
दोषियों पर कार्रवाई: जिन केंद्रों ने गाइडलाइन का उल्लंघन किया है, उन स्कूल प्रशासनों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।
पारदर्शिता: आगामी परीक्षाओं में एडमिट कार्ड के साथ ही सामान रखने की व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख हो।
निष्कर्ष: कब सुधरेगा सिस्टम?
रीना सिंह की इस आवाज़ ने अभ्यर्थियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है, लेकिन सवाल वही है— क्या बिहार का प्रशासनिक अमला इस जमीनी हकीकत पर संज्ञान लेगा? क्या भविष्य में छात्रों को इन छोटी-छोटी लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाली समस्याओं से मुक्ति मिलेगी?
ब्यूरो रिपोर्ट, अटल सत्य टीवी न्यूज 24

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