बेंगलुरु: फिटनेस के लिए उम्र मात्र एक संख्या, टीसीएस
मैराथन में वरिष्ठ नागरिकों ने दिखाया अद्भुत जज्बाअजय बियानी की रिपोर्ट इंदौर।
बेंगलुरु। कहते हैं कि यदि मन में उत्साह और शरीर में अनुशासन हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इसकी जीती-जागती मिसाल बेंगलुरु के डोंडा कुंडी स्थित एक्मे बैलेट सोसायटी के वरिष्ठ नागरिकों ने पेश की है। हाल ही में टीसीएस (TCS) द्वारा आयोजित तीन किलोमीटर मैराथन में सोसायटी के बुजुर्गों ने जिस ऊर्जा और जोश के साथ हिस्सा लिया, वह न केवल सराहनीय है बल्कि युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है।
एक्मे बैलेट सोसायटी के ये वरिष्ठ सदस्य पिछले चार वर्षों से लगातार इस मैराथन का हिस्सा बन रहे हैं। प्रतिभागियों का मानना है कि यह आयोजन सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य, अनुशासन और सामूहिक उल्लास का महापर्व है। उनका संदेश स्पष्ट है: नियमित सैर और व्यायाम के जरिए एक सक्रिय और सकारात्मक जीवन जिया जा सकता है।
दौड़ के बाद उत्सव जैसा माहौल
मैराथन पूरा करने के बाद वरिष्ठ नागरिकों ने जीत का जश्न बड़े ही धूमधाम से मनाया। आयोजन स्थल पर संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समूह प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। हंसी-खुशी और एक-दूसरे को बधाई देते हुए सभी ने स्वस्थ जीवन शैली का संकल्प दोहराया।
इस मैराथन में भाग लेने वाले प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे:
कुमकुम माथुर, कनक हरलालका, कृष्णा माल्या, राधा के. माल्या।
आर. एस. नारायण, एस. राधा, अजय कुमार, अंजू बियानी।
कृष्णा अग्रवाल, शंकरलाल डूडानी, राज किशोर कपूर, हरीश रामचंद ठडानी।
विजय कुमार भाटिया, वीना कपूर, विजय राठी, किरण राठी।
सुरेंद्र कुमार चांदना, रचना ठडानी, वंदना भाटिया।
अल्पना सांतरा, बी. सांतरा, वंजा नायर, सुनीता खन्ना और विनोद तिवारी।
"यह आयोजन हमें हर साल नई ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर देता है। समाज से जुड़े रहने और खुद को फिट रखने का यह सबसे बेहतरीन मंच है।"
निष्कर्ष: वरिष्ठजनों की यह सक्रिय भागीदारी यह साबित करती है कि फिटनेस और उत्साह की कोई आयु सीमा नहीं होती। समाज के इन 'अनुभवी सितारों' ने आज साबित कर दिया कि हौसलों की उड़ान उम्र की मोहताज नहीं होती।
रिपोर्ट: अटल सत्य टीवी न्यूज 24



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