अटल सत्य टीवी न्यूज 24 | विशेष रिपोर्ट
निजी स्कूल पर मनमानी फीस वसूली और छात्र को बाहर निकालने का आरोप, अभिभावक ने लगाई गुहार
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक निजी विद्यालय के प्रबंधन पर दबंगई दिखाते हुए निशुल्क शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। पीड़ित अभिभावक ने लिखित प्रार्थना पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से न्याय की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अभिभावक के अनुसार उनके बच्चे का प्रवेश सरकारी कोटे (RTE) के तहत विद्यालय में हुआ था, जिसके अंतर्गत शिक्षा पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए। लेकिन विद्यालय प्रबंधन द्वारा बच्चे से फीस की मांग की जा रही थी। जब अभिभावक फीस देने में असमर्थ रहे, तो बच्चे को स्कूल से बाहर कर दिया गया।
प्रार्थना पत्र में अभिभावक ने बताया कि:
स्कूल प्रशासन बार-बार फीस जमा करने का दबाव बना रहा था
मना करने पर बच्चे को कक्षा से बाहर कर दिया गया
शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई
कई बार स्कूल जाकर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया
गंभीर सवाल
यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है:
क्या निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का पालन कर रहे हैं?
क्या गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, RTE के तहत चयनित बच्चों से फीस लेना नियमों के खिलाफ है और ऐसा करने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
The Times of India
RTI और शिकायत का सहारा
अभिभावक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी जानकारी मांगी है और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। RTI कानून नागरिकों को सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने का अधिकार देता है।
शिक्षा मंत्रालय
पीड़ित अभिभावक ने प्रशासन से मांग की है कि:
बच्चे को पुनः स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए
स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जाए
निष्कर्ष
लखनऊ का यह मामला शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
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अटल बिहारी शर्मा की ख़ास रिपोर्ट लखनऊ।



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