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विशेष रिपोर्ट: लखनऊ कमिश्नरेट में 'सिस्टम' पर भारी 'सिपाही'? 

लखनऊ | अटल सत्य टीवी न्यूज 24

​उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार और ढीली कार्यप्रणाली पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है, लेकिन राजधानी लखनऊ के कुछ थानों में व्यवस्था को ठेंगा दिखाया जा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि लखनऊ में पुलिस महानिदेशक (DGP) से लेकर पुलिस आयुक्त (CP) तक बदल गए। DCP, ADCP, ACP और थाना प्रभारियों की कुर्सियां भी बदल गईं, लेकिन कुछ 'खास' सिपाही ऐसे हैं जो लॉकडाउन के पहले से एक ही थाने में अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं।

स्थानांतरण की 'फाइल' और 'रवानगी' का खेल:

हमारी पड़ताल में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सूत्रों के अनुसार, कागजों पर कुछ सिपाहियों का स्थानांतरण किया भी गया, लेकिन हकीकत में उनकी 'रवानगी' आज तक नहीं हुई। आखिर वह कौन सी अदृश्य शक्ति है जो इन सिपाहियों को पुराने थाने से मुक्त नहीं होने दे रही?

​एक ही थाने में 5-6 साल से लगातार जमे रहने के कारण इन सिपाहियों का स्थानीय स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क बन जाता है, जिससे पुलिस की निष्पक्ष छवि धूमिल होती है। जब जिले के कप्तान से लेकर थानेदार तक बदले जा सकते हैं, तो इन सिपाहियों पर मेहरबानी का राज क्या है?

प्रशासन से 'अटल सत्य' के तीखे सवाल:

  1. ​क्या इन सिपाहियों का रसूख आला अधिकारियों के आदेशों से भी बड़ा है?
  2. ​स्थानांतरण आदेश के बावजूद इनकी रवानगी क्यों नहीं की गई?
  3. ​क्या प्रशासन को इन सिपाहियों के कारण क्षेत्र में पनप रहे गठजोड़ की खबर नहीं है?

सकारात्मक बदलाव के लिए सुझाव:

अटल सत्य टीवी न्यूज 24 उत्तर प्रदेश सरकार और गृह विभाग से यह मांग करता है कि लखनऊ के सभी थानों में तैनात सिपाहियों के कार्यकाल की गहन जांच कराई जाए। जो सिपाही वर्षों से एक ही जगह जमे हैं, उन्हें तत्काल हटाकर नए कार्यस्थलों पर भेजा जाए ताकि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और पारदर्शिता देखने को मिले।

​अब देखना यह है कि इस खबर के बाद शासन प्रशासन इन 'जमे' हुए सिपाहियों पर क्या कार्रवाई करता है या फिर मेहरबानी का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट: अटल सत्य टीवी न्यूज 24, लखनऊ।

निर्भीक पत्रकारिता, अडिग विश्वास।

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