अटल सत्य टी वी न्यूज 24
कैबिनेट निर्णय पर राज्य कर्मचारियों में नाराज़गी, परिषद अध्यक्ष जे.एन. तिवारी की प्रतिक्रिया
लखनऊ, 10 मार्च।
उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में कर्मचारी आचरण नियमावली में किए गए संशोधन को लेकर राज्य कर्मचारी संगठनों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों पर शिकंजा कस रही है, जबकि कर्मचारियों के हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले वर्षों से लंबित पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन भी शामिल है। नए प्रावधान के तहत दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की किसी भी चल संपत्ति जैसे वाहन, सोना या अन्य निवेश की सूचना तत्काल विभागाध्यक्ष को देनी होगी। वहीं छह माह के मूल वेतन से अधिक शेयर बाजार में निवेश करने पर भी घोषणा करना अनिवार्य होगा।
जे.एन. तिवारी ने कहा कि आचरण नियमावली में पहले से ही संपत्ति खरीदने और हर वर्ष उसका विवरण देने की व्यवस्था मौजूद है। इसी नियम के तहत लगभग 68 हजार कर्मचारियों का वेतन जनवरी माह से रोका गया है, क्योंकि उन्होंने अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि नए संशोधन से कर्मचारियों की सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो सकती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बेटी की शादी जैसे सामाजिक अवसरों पर वाहन और आभूषण खरीदना सामान्य बात है, लेकिन नए नियमों के तहत कर्मचारियों को ऐसे खर्चों के लिए भी सरकार को जानकारी देनी पड़ेगी, जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
परिषद अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के हित से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने में लगातार देरी कर रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग, लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग समेत कई विभागों में पदोन्नति और सेवा नियमावली वर्षों से लंबित है। वहीं राज्य विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के लिए भी अलग सेवा नियमावली नहीं बनाई गई है।
जे.एन. तिवारी ने कहा कि प्रदेश में लगभग 12 लाख राज्य कर्मचारी इस संशोधन से सीधे प्रभावित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि कर्मचारियों पर नए नियम लागू करने के साथ-साथ उनके हित से जुड़े लंबित मामलों पर भी जल्द निर्णय लिया जाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य सचिव और कार्मिक विभाग के अधिकारी कर्मचारी संगठनों के साथ समस्याओं पर संवाद नहीं कर रहे हैं। संवादहीनता के कारण कर्मचारियों में पहले से ही नाराज़गी है और ऐसे आदेशों से असंतोष और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट: अटल सत्य टी वी न्यूज 24, लखनऊ