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सत्यम और आकृति पर NSA के खिलाफ लखनऊ में उग्र विरोध, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

लखनऊ | 16 मई, 2026 

रिपोर्ट: अटल बिहारी शर्मा (अटल सत्य टीवी न्यूज 24)

​उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को नागरिक समाज और विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने वरिष्ठ पत्रकार व अनुवादक सत्यम वर्मा और शोध छात्रा आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के खिलाफ परिवर्तन चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने पुलिसिया कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा।

प्रमुख माँगें और क्षोभ

​प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम भेजे गए पत्रक में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित माँगें रखीं:

  • ​सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर लगा NSA तत्काल वापस लिया जाए।
  • ​नोएडा में मजदूरों के दमन पर रोक लगे और गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए।
  • ​मजदूरों के लिए ₹26,000 न्यूनतम वेतन की तत्काल घोषणा की जाए।

​वक्ताओं ने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि संवैधानिक प्रमुख होने के बावजूद राज्यपाल द्वारा संविधान विरुद्ध हो रही इन कार्रवाइयों पर अब तक कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया है।

"विचारधारा रखना अपराध नहीं" - सुप्रीम कोर्ट का हवाला

​प्रतिवाद सभा में वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच के हालिया टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि "वाम विचार को मानना देश में अपराध नहीं है।" कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में प्रताड़ित हुए आदित्य आनंद और रूपेश को सोमवार को पेश करने का भी आदेश दिया है।

​नेताओं ने आरोप लगाया कि:

​"सरकार और नोएडा पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। केवल जेल में रखने की नीयत से एनएसए लगाया गया है। पुलिस अदालत में सबूत पेश करने के बजाय मीडिया में अनर्गल बयानबाजी कर रही है।"


अनुवाद के पैसे को बताया जा रहा है 'संदिग्ध'

​पुलिस द्वारा सत्यम वर्मा के खाते में एक करोड़ रुपये मिलने के दावे को वक्ताओं ने 'कपोल कल्पित' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्यम देश के प्रतिष्ठित अनुवादक हैं जो देश-विदेश की किताबों के अनुवाद से अपनी आजीविका चलाते हैं। अपनी मेहनत की कमाई को अपराध की श्रेणी में खड़ा करना हास्यास्पद और दमनकारी है।

प्रतिवाद में शामिल प्रमुख हस्तियां

​इस विरोध प्रदर्शन में राजधानी के कई गणमान्य नागरिक और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें प्रमुख हैं:

  • प्रो. रमेश दीक्षित (समाजवादी चिंतक)
  • अजय सिंह (वरिष्ट पत्रकार)
  • मधु गर्ग (एडवा), दिनकर कपूर (AIPF), दिनेश सिंह (कांग्रेस)
  • धनीराम श्रमिक (समाजवादी मजदूर सभा), चंद्रशेखर (एटक)
  • शांतम निधि (आइसा), लालचन्द व अंजली (दिशा)
  • धर्मेन्द्र कुमार (चित्रकार), भगवान स्वरूप कटियार (कवि)
  • फरजाना मेंहदी व सुचित माथुर (जन संस्कृति मंच)
  • बबिता (सीटू), सरोजिनी विष्ट (एपवा), शिप्रा (स्त्री मुक्ति लीग)
  • गंगासागर (BSS), नौमीलाल (निर्माण मजदूर यूनियन)
  • राम सुरेश यादव (कुली यूनियन), विवेक शर्मा (RYA)

निष्कर्ष:

वक्ताओं ने चेतावनी दी कि चंद पूंजीपतियों के फायदे के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत गरिमा पर किए जा रहे हमले लोकतंत्र के लिए घातक हैं। असहमति की आवाजों को कुचलना बंद करना होगा।

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