विशेष रिपोर्ट: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार—सच की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार सिस्टम के लिए 'अपराधी' क्यों?
ब्यूरो रिपोर्ट: अटल सत्य टीवी न्यूज 24
नई दिल्ली/प्रदेश: कड़कड़ाती ठंड, झुलसा देने वाली धूप और मूसलाधार बारिश... ये वो मौसम हैं जिनसे लड़कर एक निष्पक्ष पत्रकार मैदान में खड़ा होता है। उसका मकसद सिर्फ खबर दिखाना नहीं, बल्कि समाज की गंदगी को साफ करना होता है। लेकिन विडंबना देखिए, जो पत्रकार अवैध खनन, भू-माफिया, जिस्मफरोशी के अड्डों और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ 'कड़वे सवाल' पूछता है, आज उसी की आवाज को सलाखों के पीछे दबाने की साजिशें रची जा रही हैं।
साजिश का शिकार बनता 'कलम का सिपाही'
जब धमकियां काम नहीं आतीं और लालच पत्रकार की कलम को नहीं डिगा पाता, तब शुरू होता है 'सिस्टम' का गंदा खेल। 'अटल सत्य टीवी न्यूज 24' के माध्यम से हम केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं कि कैसे एक ईमानदार पत्रकार को फर्जी मुकदमों, अवैध वसूली और रंगदारी (Extortion) जैसी गंभीर धाराओं में फंसाकर रास्ते से हटाने की कोशिश की जाती है।
जांच के मानक: केवल आरोप नहीं, प्रमाण चाहिए
सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यदि किसी पत्रकार पर रंगदारी का आरोप लगता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को अनिवार्य बनाया जाए:
- डिजिटल साक्ष्य की अनिवार्यता: क्या पुलिस के पास पत्रकार द्वारा दी गई धमकी का कोई ठोस ऑडियो या वीडियो प्रमाण उपलब्ध है? बिना सबूत के केवल बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज करना न्याय नहीं, प्रताड़ना है।
- संपत्ति का आकलन: सरकार को उस पत्रकार की जीवनशैली देखनी चाहिए। क्या वह करोड़ों के बंगले में रह रहा है या आज भी 3000 रुपये के किराए के कमरे में जमीन पर सोकर अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहा है? एक फटेहाल पत्रकार पर 'लाखों की रंगदारी' का आरोप खुद में एक बड़ा सवाल है।
- सुविधाओं की वास्तविकता: क्या उसके घर में एसी-कूलर की विलासिता है या वह एक पुराने पंखे के नीचे अपनी रातें काट रहा है?
भ्रष्ट तंत्र पर भी गिरे गाज: बराबर हो जवाबदेही
'अटल सत्य टीवी न्यूज 24' पुरजोर मांग करता है कि केवल पत्रकार की ही नहीं, बल्कि उस थाना प्रभारी (SO) और जांच अधिकारी (IO) की संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए जो आनन-फानन में पत्रकार को सलाखों के पीछे भेजते हैं।
"यदि जांच करने वाले अधिकारी की संपत्ति उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाई जाती है, तो उसे तत्काल निलंबित किया जाए और उस पर भी वही कठोर धाराएं लगाई जाएं जो एक निर्दोष पत्रकार पर लगाई गई हैं।"
निष्कर्ष: न्याय की पुकार
लोकतंत्र तब तक सुरक्षित है जब तक उसकी रक्षा करने वाली कलम स्वतंत्र है। अगर निष्पक्ष पत्रकारों को यूं ही फर्जी मुकदमों के जरिए दबाया गया, तो भ्रष्टाचार और अपराध का साम्राज्य अटूट हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए और पुलिसिया तंत्र के दुरुपयोग पर लगाम कसे।
अटल सत्य टीवी न्यूज 24 की यह मुहिम जारी रहेगी... सच लिखने तक, सच दिखने तक।
इस खबर को शेयर जरुर करें एडिटर इन चीफ अटल बिहारी शर्मा लखनऊ अटल सत्य टी वी न्यूज 24 निष्पक्ष खबरों का संग्रह संपर्क नंबर 9984299124



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