लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान करणी सेना पंजीकृत उत्तर प्रदेश इकाई ने अपने विचार और संगठन की आगामी रणनीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वे हिंदू धर्म, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय रहेंगे।
प्रेस वार्ता में संगठन ने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेषकर सूरजपाल सिंह अम्मू के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि संगठन निर्भीकता के साथ अपने उद्देश्यों की दिशा में कार्य करता रहेगा।
धर्म और परंपराओं के सम्मान पर जोर
करणी सेना ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदू धर्म, साधु-संतों और धार्मिक प्रतीकों के प्रति किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी या गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने ऐसे मामलों में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी भी दी।
नेताओं पर सीधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान कुछ राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तित्वों के बयानों पर भी आपत्ति जताई गई। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, चंद्रशेखर आज़ाद और राजकुमार भाटी जैसे नाम शामिल रहे। संगठन ने कहा कि धर्म और संत समाज के खिलाफ बयानबाजी से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।
धर्मांतरण और लव जिहाद पर सख्त रुख
करणी सेना ने उत्तर प्रदेश में कथित धर्मांतरण और लव जिहाद के मुद्दों को गंभीर बताते हुए कहा कि इस पर उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा। साथ ही राज्य सरकार से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि धर्मांतरण और अन्य गतिविधियों के पीछे विदेशी फंडिंग की भूमिका हो सकती है। इस विषय में जांच और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पदाधिकारियों की उपस्थिति
इस प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह राजा, कार्यवाहक अध्यक्ष अभिनव सिंह, संगठन महामंत्री वीर प्रताप सिंह, राष्ट्रीय महासचिव (महिला शक्ति) सौम्या और अवध अध्यक्ष सविता सिंह सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
करणी सेना की इस प्रेस वार्ता ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल में नई बहस को जन्म दिया है। संगठन ने जहां अपने रुख को स्पष्ट किया, वहीं सरकार और प्रशासन के लिए भी कई सवाल खड़े किए हैं।



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