लखनऊ। महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए ‘पिंक टॉयलेट’ अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बने इन टॉयलेट्स पर ताले लटके हुए हैं, जिससे आम जनता खासकर महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मौके पर ली गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि टॉयलेट पूरी तरह बंद है, शटर गिरा हुआ है और आसपास गंदगी का अंबार लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये टॉयलेट महीनों से बंद पड़े हैं, जबकि इनके निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे।
क्या सिर्फ दिखावे के लिए बने थे ‘पिंक टॉयलेट’?
महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस योजना को बड़े स्तर पर लागू किया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सवाल उठ रहा है कि—
क्या ये टॉयलेट सिर्फ उद्घाटन और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गए?
क्या रखरखाव और संचालन के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई?
जिम्मेदार कौन?
इस परियोजना का संचालन लखनऊ नगर निगम के अधीन माना जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
जब करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो फिर इनकी देखरेख क्यों नहीं हो रही?
क्या संबंधित अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत से यह स्थिति बनी?
जनता में नाराजगी
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों में इस मुद्दे को लेकर खासा आक्रोश है। महिलाओं का कहना है कि जिन सुविधाओं के लिए ये टॉयलेट बनाए गए थे, वे आज पूरी तरह निष्क्रिय हैं।
जांच की मांग
अब इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि अगर इसमें भ्रष्टाचार हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और बंद पड़े टॉयलेट्स को जल्द से जल्द चालू किया जाए।
अटल सत्य टीवी न्यूज 24 की अपील:
प्रशासन इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान ले और महिलाओं की सुविधा से जुड़े इस प्रोजेक्ट को कागजों से निकालकर जमीन पर सही मायनों में लागू करे।



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