राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का 50वां स्थापना दिवस: 13 जुलाई को गांधी भवन में होगा भव्य 'गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन'
लखनऊ | राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के गौरवमयी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। परिषद का 50वां अधिवेशन, जिसे 'गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन' के रूप में मनाया जा रहा है, आगामी 13 जुलाई को लखनऊ के गांधी भवन प्रेक्षागृह में आयोजित होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे।
62 वर्षों के संघर्ष और उपलब्धियों का साक्षी बनेगा अधिवेशन
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने बताया कि 1964-65 में सचिवालय परिसर से शुरू हुआ यह संगठन आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। रघुवर दयाल शर्मा के नेतृत्व में स्थापित इस परिषद ने पिछले 62 वर्षों में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए अनेक संघर्ष किए हैं। महंगाई भत्ते से लेकर वेतन विसंगतियों को दूर करने तक, परिषद ने हमेशा केंद्र के समान अधिकारों के लिए प्रदेश सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र
परिषद की महासचिव अरुणा शुक्ला ने इस आयोजन को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अधिवेशन युवा पीढ़ी के लिए अपने पूर्वजों के त्याग और संघर्ष को समझने का एक स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने युवा साथियों का आह्वान किया कि वे संगठन के सिद्धांतों को आत्मसात करें, ताकि प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कर्मचारी आंदोलन को और अधिक गति दी जा सके।
अधिवेशन की प्रमुख विशेषताएं:
ऐतिहासिक गौरव: 62 वर्षों के सफर और 50वें अधिवेशन को समर्पित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा, जिसमें परिषद के संपूर्ण इतिहास और शौर्य गाथा को लिपिबद्ध किया गया है।
आठवें वेतन आयोग की तैयारी: संयुक्त परिषद ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष प्रदेश के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी दावेदारी पेश की है, जिस पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आजीवन सदस्यों का सम्मान: संगठन को मजबूती प्रदान करने वाले वरिष्ठ एवं आजीवन सदस्यों को इस मंच से सम्मानित किया जाएगा।
व्यापक भागीदारी: इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जनपदों और विभिन्न विभागों से हजारों की संख्या में प्रतिनिधि शामिल होंगे।
परिषद का यह 50वां अधिवेशन न केवल अपनी उपलब्धियों के जश्न का माध्यम है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए कर्मचारी आंदोलन को एक 'नए कलेवर' और नई दिशा देने का मंच भी सिद्ध होगा



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