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» » यू पी के कर्मचारी आक्रमक आठवे वेतन आयोग का खुला विरोध

यूपी में कर्मचारी संगठनों का बड़ा ऐलान: सरकार की 'संवेदनहीनता' के खिलाफ बिगुल, आठवें वेतन आयोग के विरोध में एकजुट हुए परिसंघ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचारियों की उपेक्षा और संवादहीनता के खिलाफ प्रदेश के सभी प्रमुख कर्मचारी परिसंघों ने मोर्चा खोल दिया है। राजधानी लखनऊ के प्रेस क्लब में आज विभिन्न मान्यता प्राप्त कर्मचारी परिसंघों के अध्यक्षों और महामंत्रियों की एक अहम संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें सरकार के कर्मचारी-विरोधी रवैये पर गहरा आक्रोश जताया गया।

आठवें वेतन आयोग पर जताई आपत्ति

बैठक में मुख्य रूप से आठवें वेतन आयोग को लेकर प्रदेश के कर्मचारी नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया। नेताओं ने आरोप लगाया कि आठवां वेतन आयोग देश भर में जाकर विभिन्न संगठनों और संस्थाओं से सुझाव ले रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अधिकारियों ने जानबूझकर प्रदेश स्तरीय कर्मचारी संगठनों को आयोग के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया है। इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए सभी परिसंघों ने निर्णय लिया है कि वे आठवें वेतन आयोग के अध्यक्ष, सदस्य सचिव और प्रदेश के मुख्य सचिव को संयुक्त रूप से अपना कड़ा विरोध पत्र भेजेंगे।

प्रमुख मांगें, जिन पर सरकार खामोश:

संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पदाधिकारियों ने सरकार पर ब्यूरोक्रेसी के हावी होने का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने अपनी जिन मुख्य मांगों को जोर-शोर से उठाया, उनमें शामिल हैं:

  • ​पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली।
  • ​रिक्त पदों पर अविलंब भर्ती।
  • ​कर्मचारियों की लंबित पदोन्नतियां।
  • ​चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक हटाना।
  • ​2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की नियमावली जारी करना।
  • ​आउटसोर्स कर्मियों के लिए गठित निगम का क्रियान्वयन।

अब होगा 'निर्णायक संघर्ष'

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने जानकारी दी कि सरकार का रवैया पूरी तरह से संवेदनहीन बना हुआ है। प्रेस वार्ता का संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने किया। बैठक में रामराज दुबे, शैलेंद्र दुबे, कृतार्थ सिंह, राजेश कुमार सिंह, राजकुमार और अरुणा शुक्ला समेत अनेक शीर्ष कर्मचारी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि कॉमन मुद्दों को लेकर एक निर्णायक रणनीति बनाई जाए।

​जल्द ही सभी मान्यता प्राप्त परिसंघों के पदाधिकारी फिर से बैठक करेंगे, जिसमें भविष्य के बड़े आंदोलनात्मक कार्यक्रम और संघर्ष की रूपरेखा तय की जाएगी।

ब्यूरो रिपोर्ट: अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24

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