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UP: पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

लखनऊ | 24 मई 2026

देश में शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के मौजूदा हालात ने युवाओं के बीच असुरक्षा और गहरे विक्षोभ की स्थिति पैदा कर दी है। इसी आक्रोश की झलक आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर देखने को मिली, जहाँ 'रोजगार अधिकार अभियान' के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग

​अभियान के दौरान NEET पेपर लीक मामले को लेकर युवाओं में भारी नाराजगी देखी गई। सोशल मीडिया पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग ने जबरदस्त जोर पकड़ा। लाखों लोगों ने ऑनलाइन पिटीशन के माध्यम से परीक्षा प्रणाली में हुई धांधली पर अपना विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश में हुई लेखपाल भर्ती परीक्षा की जांच की मांग भी दिनभर ट्रेंड करती रही।

प्रमुख मांगें: कॉर्पोरेट पर टैक्स और सामाजिक सुरक्षा

​रोजगार अधिकार अभियान के कोआर्डिनेटर राजेश सचान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने मांग की कि:

  • सम्पत्ति कर (Wealth Tax): कारपोरेट घरानों और अरबपतियों की अकूत संपत्ति पर टैक्स लगाया जाए।
  • संसाधनों का आवंटन: जुटाए गए संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकारों पर खर्च किया जाए।
  • रेलवे में बहाली: 'राष्ट्रीय कुली मोर्चा' ने भी इस अभियान का समर्थन करते हुए रेलवे में पक्की नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की मांग उठाई।
  • ​"नौजवानों की बेचैनी आज सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक दिखाई दे रही है। उभरते हुए प्लेटफॉर्म्स को भी मनोरंजन के बजाय शिक्षा और पेंशन जैसे जनजीवन के बुनियादी सवालों को केंद्र में रखना चाहिए।"

    राजेश सचान, कोआर्डिनेटर


    देशभर से मिला समर्थन

    ​इस डिजिटल आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि शोधार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। अभियान में प्रमुख रूप से निम्नलिखित नाम चर्चा में रहे:

    • विशाल सिंह (छात्र नेता, लखनऊ विश्वविद्यालय)
    • राम सुरेश यादव (संयोजक, राष्ट्रीय कुली मोर्चा)
    • हर्शल ठाकुर (IIMC दिल्ली), सुमित गोरसी (शिमला), अर्जुन प्रसाद (प्रयागराज)
    • ​मेरठ और लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्र एवं अन्य गणमान्य नागरिक।

    ​सोशल मीडिया पर बढ़ता यह दबाव सरकार के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है। युवाओं का स्पष्ट संदेश है कि अब नारों से नहीं, बल्कि ठोस रोजगार नीति और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से ही समाधान संभव है।

    रिपोर्ट: अटल सत्य TV न्यूज 24 डेस्क

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