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संविदा शिक्षकों का आक्रोश: 16 साल की सेवा के बाद

भी नहीं हुआ नियमितीकरण, मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए शिक्षक
लखनऊ, 12 अप्रैल।
समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने की, जबकि संचालन महामंत्री अरुण शुक्ला ने किया।
बैठक में प्रदेश के विभिन्न मंडलों से पहुंचे शिक्षकों ने अपनी समस्याओं को खुलकर रखा। शिक्षकों ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2008 में हुई थी और 16-17 वर्षों की लंबी सेवा के बावजूद आज तक उनका नियमितीकरण नहीं किया गया है। जबकि वे सभी नियमानुसार चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए हैं और आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी रखते हैं।
शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पद के अनुरूप वेतनमान, न्यूनतम ग्रेड वेतन और महंगाई भत्ते जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में नियमितीकरण से सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर उनकी अनदेखी की जा रही है।
बैठक में संविदा नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। शिक्षकों का कहना है कि विभागीय अधिकारी मनमानी करते हुए 60% परीक्षा परिणाम और प्रत्येक छात्र के 60% अंक लाने की अनिवार्यता थोप रहे हैं। इस आधार पर कई शिक्षकों को सेवा से बाहर किया जा चुका है। जनजाति विकास विभाग में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां शिक्षक इस नीति का शिकार हुए हैं।
शिक्षकों ने इस नीति को अव्यवहारिक और तुगलकी फरमान बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बोर्ड परीक्षा में इस तरह का नियम लागू नहीं है, ऐसे में केवल एक विभाग में इसे लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री स्तर तक उठाया जाएगा और समाधान के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि परिषद विनियमितिकरण नियमावली 2026 लागू कराने के लिए प्रयासरत है, जिसमें समाज कल्याण विभाग के संविदा शिक्षक और फार्मासिस्ट शामिल किए जाएंगे।
परिषद ने नवीनीकरण में हो रही मनमानी के खिलाफ भी आवाज उठाने का आश्वासन दिया और कहा कि पीड़ित शिक्षकों की समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएंगी।
बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि चुनावी वर्ष में कुछ अधिकारी जानबूझकर शिक्षकों को हटाने की कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंच सके। शिक्षकों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
ब्यूरो रिपोर्ट अटल सत्य टी वी न्यूज 24 निष्पक्ष खबरों का संग्रह।
अटल बिहारी शर्मा की ख़ास रिपोर्ट।

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