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बाराबंकी लोक अदालत का रिकॉर्ड 34 करोड़ 79 लाख से अधिक धनराशि जमा करवाई।


बाराबंकी
तौफीक अहमद, ब्यूरो चीफ
राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,76,663 मामलों का निस्तारण, 34 करोड़ 79 लाख से अधिक की धनराशि जमा
बाराबंकी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर शनिवार को जनपद बाराबंकी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा श्रीवास्तव ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
इस अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी श्रीमती अल्पना सक्सेना, न्यायिक अधिकारी श्रीमती वंदना सिंह प्रथम, अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी श्री कृष्ण चंद्र सिंह, पूर्णकालिक सचिव श्रीमती शिवानी रावत, अपर जिलाधिकारी न्यायिक राजकुमार, अपर पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी, अग्रणी जिला प्रबंधक बैंक ऑफ इंडिया सौरभ मौर्या सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, कर्मचारी और पत्रकार उपस्थित रहे।
जनपद न्यायाधीश श्रीमती प्रतिमा श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि संवाद, संवेदनशीलता और सहमति ही लोक अदालत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि “विवाद नहीं, समाधान हमारा लक्ष्य हो और टकराव नहीं, समन्वय हमारा मार्ग हो।” लोक अदालत के माध्यम से आम लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों, राजस्व विभाग, बैंकों तथा अन्य विभागों के कुल 1,76,663 मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें 34,79,40,015 रुपये अर्थदंड एवं प्रतिकर के रूप में जमा कराए गए।
सिविल कोर्ट बाराबंकी के विभिन्न न्यायालयों द्वारा 34,670 मामलों का निस्तारण करते हुए 11,84,46,775 रुपये वसूल किए गए। वहीं प्री-लिटिगेशन स्तर पर 1,41,993 मामलों का निस्तारण कर 22,94,93,239 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण न्यायालय द्वारा 143 मामलों का निस्तारण करते हुए 9,06,72,076 रुपये प्रतिकर राशि प्रदान की गई। सभी मजिस्ट्रेट न्यायालयों द्वारा 32,467 मामलों का निस्तारण कर 37,30,570 रुपये अर्थदंड वसूल किया गया। इसमें सीजेएम सुधा सिंह द्वारा सर्वाधिक 10,619 मामलों का निस्तारण किया गया।
राजस्व न्यायालयों में 75,206 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि विभिन्न बैंकों ने 2737 एनपीए खातों का निस्तारण कर 19,60,17,662 रुपये की वसूली की। इसमें बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सर्वाधिक 1144 मामलों का निस्तारण किया गया।
लोक अदालत के दौरान पारिवारिक न्यायालय द्वारा 48 जोड़ों को समझौते के बाद एक साथ विदा किया गया। इस अवसर पर जोड़ों को माला पहनाकर मिठाई वितरित की गई तथा बच्चों को चॉकलेट दी गई।
कार्यक्रम में वादकारियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, स्वच्छ पेयजल और अल्पाहार की भी व्यवस्था की गई। पराविधिक स्वयंसेवकों ने आमजन की सहायता की।

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