लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गौतम बुद्ध मार्ग स्थित ग्लोब कैफे के पास हुई एक घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर पुलिस आम जनता से सजग नागरिक बनकर अपराध की सूचना देने की अपील करती है, वहीं दूसरी ओर सूचना देने वाले व्यक्ति को ही परेशान करने का आरोप सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आकाश शर्मा नामक युवक ने बताया कि दिनांक 6 मार्च 2026 की रात करीब 9:35 बजे वह अपने निजी कार्य से गौतम बुद्ध मार्ग से गुजर रहा था। उसी दौरान सड़ाना इलेक्ट्रॉनिक के पास स्थित ग्लोब कैफे के सामने दो गुटों के बीच आपसी झगड़ा हो रहा था। स्थिति को गंभीर देखते हुए आकाश शर्मा ने एक जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाते हुए डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी और लगभग 20 सेकेंड का वीडियो भी अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।
आरोप है कि पुलिस के मौके पर पहुंचते ही स्थिति समझने के बजाय कैसरबाग थाने के एक दारोगा ने आकाश शर्मा को ही पकड़ लिया। जबकि आकाश शर्मा लगातार बताते रहे कि उनका झगड़े से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने केवल एक जागरूक नागरिक होने के नाते पुलिस को सूचना दी थी।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिस उन्हें कैसरबाग थाने ले गई और करीब 2 घंटे तक बिना किसी अपराध के बैठाकर रखा। इतना ही नहीं, उनका नाम भी उन लोगों के साथ रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया जो झगड़े में शामिल बताए जा रहे थे।
आकाश शर्मा का कहना है कि यदि सजग नागरिक बनकर पुलिस को सूचना देना ही अपराध बन जाए, तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति पुलिस की मदद के लिए आगे आने से हिचकेगा। इस घटना से उनकी सामाजिक छवि भी प्रभावित हुई है।
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित दारोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि पुलिस और जनता के बीच विश्वास कायम रह सके।
अब सवाल यह उठता है कि जब पुलिस खुद नागरिकों से सहयोग की अपील करती है, तो क्या सूचना देने वाले नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?
अटल सत्य टी वी न्यूज 24
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