लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कें आज नारों और विरोध प्रदर्शनों से गूंज उठीं। मुद्दा है 33% महिला आरक्षण का, जिसे लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। 'अटल सत्य TV News 24' की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों की संख्या में महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर सपा सुप्रीमो के रुख के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
विरोध की मुख्य वजह: आरक्षण के भीतर आरक्षण का पेंच?
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का स्टैंड लंबे समय से यह रहा है कि महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाए। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि 'कोटे में कोटा' की मांग दरअसल इस ऐतिहासिक सुधार को रोकने या लटकाने की एक रणनीति है।
इसी बात को लेकर आज महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि:
"जब दशकों बाद महिलाओं को उनका हक मिल रहा है, तो राजनीतिक दल इसमें अड़ंगा क्यों लगा रहे हैं? यह विरोध अखिलेश यादव को आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है।"
हज़ारों की संख्या में महिलाओं को विधानसभा मार्ग पर महिलाओं का भारी जमावड़ा देखा गया।
चुनावी समीकरण: यूपी में महिला वोट बैंक अब एक निर्णायक शक्ति बन चुका है। ऐसे में महिलाओं का यह सीधा विरोध सपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।
सीधा प्रहार: अखिलेश यादव के खिलाफ सीधे तौर पर नारेबाजी की, जिसे 'भारी पड़ने वाली' राजनीतिक चूक माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अखिलेश यादव अपनी छवि 'महिला आरक्षण विरोधी' के रूप में बनने से नहीं रोक पाए, तो 2027 के विधानसभा चुनावों में 'आधी आबादी' का यह गुस्सा साइकिल की रफ्तार रोक सकता है। बीजेपी इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, वहीं सपा अब इस डैमेज कंट्रोल की तैयारी में जुट गई है।
ब्यूरो रिपोर्ट, अटल सत्य TV News 24


