2026-27 स्थानांतरण सत्र शून्य करने की मांग, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने CM को भेजा प्रस्ताव
लखनऊ, 20 अप्रैल:
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित स्थानांतरण सत्र को शून्य घोषित करने की मांग उठाई है। परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल पोर्टल के माध्यम से इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2027 के पूर्वार्ध में संभावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए 2026-27 का स्थानांतरण सत्र संवेदनशील माना जा रहा है। परिषद का कहना है कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के स्थानांतरण से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सामान्य स्थानांतरण सत्र को निरस्त किया जाना आवश्यक है।
परिषद ने सुझाव दिया है कि यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में स्थानांतरण करना जरूरी हो, तो सभी संवर्गों में कुल मिलाकर 10 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण न किए जाएं। साथ ही स्थानांतरण सत्र समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार के प्रस्तावों पर विचार न करने की मांग भी की गई है।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई विभागों में स्थानांतरण सत्र समाप्त होने के बाद मनमाने तरीके से तबादले किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। परिषद ने इस प्रक्रिया को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में स्थानांतरण नीति को लेकर 21 बिंदुओं पर सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से पति-पत्नी को एक ही स्थान पर तैनाती, गंभीर रूप से बीमार या दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को स्थानांतरण से छूट, सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों को गृह जनपद में तैनाती जैसे मानवीय पहलुओं को शामिल किया गया है।
इसके अलावा कर्मचारी संगठनों के निर्वाचित पदाधिकारियों को स्थानांतरण से मुक्त रखने, राजनीतिक या बाहरी दबाव में बिना जांच के स्थानांतरण न करने तथा शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
परिषद ने पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त स्थानांतरण प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी समिति गठित करने का सुझाव भी दिया है, जिसमें अनुभवी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शामिल किया जा सकता है।
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव (कार्मिक) को ईमेल के माध्यम से भेजा गया है।



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