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बढ़ रहे पान मसाला सिगरेट के कीमतों के बीच निम्न वर्ग के लोगों पर पड़ रहा असर पढ़िए ख़बर अटल सत्य टी वी न्यूज 24 निष्पक्ष खबरों के संग्रह पर अटल बिहारी शर्मा के साथ।

अटल सत्य टी वी न्यूज 24
संपादकीय
बढ़ती कीमतों से मजदूर वर्ग की जेब पर बोझ, पान मसाला और सिगरेट पर सख्त प्रतिबंध की उठी मांग
देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब पान मसाला, गुटखा और सिगरेट की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने मजदूर और निम्न आय वर्ग के लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। हालात यह हैं कि जो गुटखा पहले तीन रुपये में मिलता था, वही अब पाँच से छह रुपये में बिक रहा है, जबकि छह रुपये की सिगरेट अब नौ से दस रुपये तक पहुंच गई है। छोटे दुकानदारों और उपभोक्ताओं के अनुसार कंपनियों द्वारा कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे आम आदमी परेशान है।
मजदूर वर्ग के लोग, जो दिनभर कड़ी मेहनत के बाद थोड़ी बहुत तंबाकू या पान मसाला का सेवन करते हैं, अब बढ़ती कीमतों के कारण आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदायक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है। तंबाकू और निकोटीन से जुड़े उत्पाद कई घातक बीमारियों का कारण बनते हैं।
ऐसे में समाज के कई वर्गों का मानना है कि केवल कीमत बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को पान मसाला, गुटखा और सिगरेट जैसे उत्पादों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि इन उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए तो इससे समाज को स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर लाभ मिल सकता है।
साथ ही जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को तंबाकू और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना भी बेहद जरूरी है। जब तक समाज खुद इन हानिकारक आदतों से दूरी नहीं बनाएगा, तब तक केवल सरकारी कदम पर्याप्त साबित नहीं होंगे।
स्पष्ट है कि बढ़ती कीमतें जहां एक ओर मजदूर वर्ग की जेब ढीली कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में समय की मांग है कि सरकार, समाज और स्वयं नागरिक मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।