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लखनऊ: डीसीपी पश्चिम का सख्त निर्देश, लंबित मामलों का हो जल्द निस्तारण

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वी मार्ट साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अभियान नाका कोतवाली पुलिस ने किया लोगों को अगाह

वी मार्ट में साइबर अपराध के प्रति जागरूकता कार्यक्रम, महिलाओं को बताए सुरक्षा के उपाय अटल बिहारी शर्मा  लखनऊ। थाना नाका हिंडोला ...

पत्नी बहन की गोली मारकर किया कत्ल फिर खुद को गोली मार कर किया जीवन लीला समाप्त

पत्नी और बहन की हत्या के बाद खुदकुशी: मानस वाजपेयी आखिर क्या थी वजह?
लखनऊ | अटल बिहारी शर्मा की रिपोर्ट
लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में 20 अगस्त को हुई तीन मौतों की सनसनीखेज घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक एसबीआई कर्मचारी मानस वाजपेयी ने पहले अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा को गोमतीनगर स्थित उनके बैंक के बाहर गोली मारी। इसके बाद वह हुसड़िया चौराहे के पास स्थित अपने घर पहुंचा, जहां उसने अपनी बहन की भी गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
आखिर क्यों उठाया इतना खौफनाक कदम?
पुलिस की शुरुआती जांच में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद और तलाक की कानूनी प्रक्रिया को अहम पहलू माना जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार तलाक और स्त्रीधन को लेकर भी विवाद चल रहा था। हालांकि, घटना की वास्तविक वजह की पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले में मानस के व्हाट्सऐप स्टेटस ने भी जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा दी है। रिपोर्टों के अनुसार उसने पत्नी पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए स्टेटस लगाया था। पुलिस इस डिजिटल सामग्री को घटना की पृष्ठभूमि समझने के लिए अहम सुराग मानकर जांच कर रही है।
दो जगह वारदात, तीन मौतें और तीन हथियार
इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वारदात दो अलग-अलग स्थानों पर हुई। पहले बैंक के बाहर दिव्या की हत्या हुई और उसके बाद मानस हुसड़िया स्थित घर पहुंचा, जहां उसकी बहन की मौत हुई। इसके बाद मानस ने खुद भी जान दे दी। जांच के दौरान तीन हथियार मिलने की बात सामने आई है, जिससे पुलिस के सामने कई सवाल खड़े हुए हैं।
कई सवाल अभी भी अनसुलझे
क्या मानस ने पहले से पूरी वारदात की योजना बनाई थी?
क्या पति-पत्नी के बीच चल रहा विवाद ही इस खूनी वारदात की मुख्य वजह था?
बहन को निशाना बनाने के पीछे क्या कारण था?
तीन हथियार घटनास्थल तक कैसे पहुंचे?
और घटना से पहले तथा बाद में सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट का इस मामले से क्या संबंध है?
इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और डिजिटल सबूतों से सामने आने की उम्मीद है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद जब संवाद और कानूनी समाधान की सीमा से बाहर चले जाते हैं तो उनका परिणाम कितना भयावह हो सकता है।
अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24 के लिए
अटल बिहारी शर्मा की रिपोर्ट

पांच अभियुक्त गिरफ्तार पारा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस पर किए थे पथराव!

लखनऊ: नगर निगम और पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने वाले 5 अवैध डेयरी संचालक गिरफ्तार
​रिपोर्ट: अटल बिहारी शर्मा
स्थान: लखनऊ (थाना पारा क्षेत्र)
​लखनऊ: राजधानी लखनऊ के थाना पारा क्षेत्र में अवैध रूप से चल रही डेयरी और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम पर जानलेवा हमला करने वाले 5 वांछित आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपियों ने कार्रवाई से बचने के लिए न सिर्फ सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की थी, बल्कि पुलिस बल पर लाठी-डंडों और लोहे की जंजीरों से हमला कर सरकारी काम में बाधा भी डाली थी।
​क्या था पूरा मामला?
​दिनांक 16 अगस्त 2026 को गदियाना बादल खेड़ा (बुद्धेश्वर) में अवैध डेयरी संचालन और गंदगी फैलाने की सूचना पर नगर निगम की टीम स्थानीय पुलिस के साथ कार्रवाई करने पहुंची थी। जब टीम ने अवैध रूप से पाले जा रहे पशुओं को जब्त करने और जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की, तो डेयरी संचालकों ने उग्र रूप धारण कर लिया।
​आरोपियों ने एकजुट होकर नगर निगम के वाहनों पर पथराव किया, जिससे गाड़ियों के शीशे टूट गए। जब पुलिस टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने लाठी-डंडों और लोहे की जंजीरों से पुलिस बल पर जानलेवा हमला कर दिया।
​इस घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके से दो महिला आरोपियों (आफरीन और खुशबुन) को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मुख्य आरोपी फरार हो गए थे। इस मामले में थाना पारा में बीएनएस की गंभीर धाराओं (191(3), 191(2), 190, 109(1), 115(2), 352, 351(3), 121(2), 132, 324(3)) सहित लोक संपत्ति निवारण अधिनियम और 7 CLA एक्ट के तहत एफआईआर (मु0अ0सं0 574/2026) दर्ज की गई थी।
​मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी
​फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस टीम को 18 अगस्त 2026 को बड़ी सफलता मिली। मुखबिर की सटीक सूचना पर थाना पारा पुलिस ने गदियाना आदर्श विहार, बुद्धेश्वर क्षेत्र से 5 मुख्य वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
​गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
​सराफत अली लाल बाल वाला (उम्र 42 वर्ष) - निवासी सुरती खेड़ा, माल (हाल पता: डिप्टी खेड़ा)
​रिजवान (उम्र 25 वर्ष) - निवासी बघौड़ा, औरास, उन्नाव (हाल पता: गदियाना आदर्श विहार)
​मो0 सलामुद्दीन अली (उम्र 28 वर्ष) - निवासी कांचारी, कासिमपुर, हरदोई (हाल पता: राजाजीपुरम)
​शहाबुद्दीन (उम्र 32 वर्ष) - निवासी कांचारी, कासिमपुर, हरदोई (हाल पता: राजाजीपुरम)
​मो0 इस्लाम (उम्र 20 वर्ष) - निवासी कांचारी, कासिमपुर, हरदोई (हाल पता: राजाजीपुरम)
​पूछताछ में हुआ खुलासा
​पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे बिना किसी वैध लाइसेंस या दस्तावेज के अपने घरों में काफी संख्या में भैंसें पालकर दूध का व्यापार कर रहे थे। नगर निगम ने पहले भी इनके खिलाफ कार्रवाई की थी। 16 अगस्त को जब टीम दोबारा पहुंची, तो पशुओं के जब्त होने और भारी जुर्माने के डर से उन्होंने यह हिंसक कदम उठाया।
​कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम
​इस सराहनीय गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली थाना पारा की पुलिस टीम में ये अधिकारी शामिल रहे:
​श्री सुरेश सिंह (प्रभारी निरीक्षक)
​उ0नि0 श्री चेतन आजाद
​उ0नि0 श्री पुनीत लोहिया
​उ0नि0 श्री विभोर सिंह
​उ0नि0 श्री हर्ष यादव
​हे0का0 मुनीर अहमद, हे0का0 तेजबहादुर, हे0का0 जितेन्द्र सिंह और का0 बादल।
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नवजात कथित बिक्री पर मामले में अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि आरोप निराधार है

नवजात की कथित बिक्री मामले में सेंट मैरी पॉलीक्लिनिक का पक्ष, आरोपों को बताया निराधार; निष्पक्ष जांच में सहयोग का भरोसा
लखनऊ, 7 अगस्त 2026। कुर्सी रोड स्थित सेंट मैरी पॉलीक्लिनिक ने नवजात बच्चे की कथित बिक्री के मामले में अपना आधिकारिक पक्ष जारी करते हुए अस्पताल पर लगाए गए आरोपों को निराधार, तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए और जांच एजेंसियों को अस्पताल की ओर से हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, चाइल्ड लाइन को सूचना मिली थी कि अस्पताल के माध्यम से एक नवजात लड़के को बेचा गया है। हालांकि, अस्पताल ने इस आरोप से स्पष्ट रूप से इनकार करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार अस्पताल की ऐसी किसी गतिविधि में कोई भूमिका नहीं है।
प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में बहादुरपुर निवासी रेनू शर्मा का नाम सामने आया है, जो लगभग पांच से छह माह पहले उपचार के लिए अस्पताल आई थीं। अस्पताल के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों में आरती देवी के नाम से पर्चा बनाए जाने तथा किसी अन्य व्यक्ति के उपचार से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। अस्पताल का कहना है कि यदि किसी ने गलत नाम, पहचान या जानकारी देकर उपचार कराया है, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक जिम्मेदारी तय की जा सके।
सेंट मैरी पॉलीक्लिनिक ने कहा है कि पुलिस, प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य अभिलेख नियमानुसार उपलब्ध कराए जाएंगे। अस्पताल का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए और अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजी साक्ष्यों तथा जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
अस्पताल प्रबंधन ने मीडिया से भी अपील की है कि मामला नवजात बच्चे से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी आरोप को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत न किया जाए। प्रबंधन ने कहा कि वह मीडिया के समक्ष अपना पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार है।
अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24 इस मामले में संबंधित सभी पक्षों का पक्ष सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है। मामले की जांच जारी है और जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

लखनऊ अग्नि कांड में फंसे लोगों को निकालने के लिए तोड़ी जा रही दीवार

लखनऊ का अलीगंज कोचिंग अग्निकांड: 15 परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए कोचिंग अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। हादसे में कई छात्र-छात्राओं की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल कार्रवाई से उन परिवारों को न्याय मिल पाएगा, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया?
मौत के बाद उठे सवाल: सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी
अटल सत्य टीवी की इस विशेष रिपोर्ट में हम सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बनाए गए नियमों का पालन क्यों नहीं हो पाया।
जिस भवन में कोचिंग संचालित हो रही थी, उसकी अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन मानकों की जांच अब जांच एजेंसियों के सामने बड़ा विषय है।
सवाल यह है कि:
क्या भवन में फायर सेफ्टी के सभी इंतजाम मौजूद थे?
क्या समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट किया गया था?
क्या जिम्मेदार विभागों द्वारा निरीक्षण प्रक्रिया सही तरीके से हुई?
राजधानी में अवैध संचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
लखनऊ जैसे बड़े शहर में कई जगहों पर आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
ऐसे में यह जरूरी है कि:
कोचिंग संस्थानों,
अस्पतालों,
स्कूलों,
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों
में सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच हो।
अटल सत्य टीवी के सवाल: जवाबदेही तय कब होगी?
लखनऊ की इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जवाबदेही किसकी?
क्या केवल निलंबन से समस्या का समाधान हो जाएगा या हादसे की पूरी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी?
सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ?
क्या राजधानी में चल रहे संस्थानों की नियमित जांच हो रही है?
नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई कब होगी?
अगर कहीं भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
फायर ऑडिट केवल कागजों तक सीमित तो नहीं?
क्या सभी संवेदनशील भवनों में सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में लागू है?
चेतावनी: एक हादसा पूरे सिस्टम को जगाने के लिए काफी है
आज अलीगंज की घटना ने पूरे शहर को चिंता में डाल दिया है। जरूरत है कि प्रशासन सभी कोचिंग संस्थानों और भीड़भाड़ वाले भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करे, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटना दोबारा न हो।
अटल सत्य टीवी मांग करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की जिम्मेदारी तय हो और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।
अटल सत्य टीवी की विशेष रिपोर्ट — प्रशासन से जवाब मांगती है।
इस रूप में खबर की धार भी बनी रहेगी और चैनल के लिए कानूनी जोखिम भी काफी कम होगा।

कथित प्यार का एक और खौफनाक मामला पति को उत्तरी मौत के घाट पत्नी

सच्चाई आई सामने: पत्नी ने सरकारी टीचर पति को रास्ते से हटाकर प्रेमी के साथ रचाई थी साजिश, 3 साल बाद खुला खौफनाक राज
​अलीगढ़/बांदा: अतरौली तहसील के ग्राम चंडोला सुजानपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक पत्नी ने अपने पति की हत्या की पटकथा लिखी और उसे 'सड़क दुर्घटना' का नाम देकर दबा दिया। 3 साल बाद जब पत्नी के अपने ही प्रेमी से संबंध बिगड़े, तो उसने खुद ही इस पूरे कांड का खुलासा कर दिया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
​क्या है पूरा मामला?
​मृतक रॉबिन भान सिंह, जो कि एक सरकारी शिक्षक थे, की मां नीरज देवी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की खुशी के लिए उसकी मर्जी से अंजलि नाम की लड़की से शादी कराई थी। शादी के बाद बेटे ने अपनी पत्नी को न केवल पढ़ाया-लिखाया, बल्कि उसे भी सरकारी नौकरी दिलवाई। लेकिन, पत्नी अंजलि के संबंध अपने पुराने प्रेमी अभिषेक से लगातार जारी थे।
​पीड़ित मां के अनुसार, अंजलि उनके बेटे की सरकारी नौकरी और पैसे का इस्तेमाल अपने प्रेमी अभिषेक के लिए कर रही थी। जब उनका रिश्ता और गहरा हुआ, तो अंजलि ने अपने पति को ही रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
​मौत की रात और रची गई साजिश
​4 मार्च 2023 की रात लगभग 2:00 बजे अंजलि ने रॉबिन को वीसलपुर (पीलीभीत) बुलाया। बहाना यह बनाया गया कि उसे छुट्टी नहीं मिल रही है और अधिकारी उस पर दबाव डाल रहे हैं। रॉबिन अपनी पत्नी की बात मानकर आधी रात को मोटरसाइकिल से वहां पहुंच गए। नीरज देवी ने बताया कि जब उन्होंने फोन किया, तो अंजलि के पिता ने फोन उठाकर उन्हें धमकाया और कहा कि "वे सो गए हैं, उन्हें डिस्टर्ब मत करो।"
​अगली सुबह सूचना मिली कि रॉबिन की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। परिवार जब बदायूं पहुंचा, तो पुलिस ने दबाव में इसे एक सामान्य हादसा बताकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की।
​3 साल बाद प्रेमी ने ही खोला राज
​घटना के बाद अंजलि अपनी बेटी को लेकर अपने प्रेमी अभिषेक के साथ आगरा में रहने लगी। लेकिन हाल ही में अंजलि का अभिषेक से भी झगड़ा हो गया और उसने किसी तीसरे युवक को अपना नया प्रेमी बना लिया। इस बात से नाराज अभिषेक ने बदला लेने के लिए 3 साल बाद रॉबिन की हत्या का पूरा सच उगल दिया। अभिषेक ने स्वीकार किया कि रॉबिन की मौत कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
​पुलिस जांच पर उठे सवाल
​बांदा के थाना बिसंडा क्षेत्र से जुड़े इस मामले में अब परिजनों ने फिर से आवाज उठाई है। मां नीरज देवी का आरोप है कि शव पर चोटों के निशान थे, जो दुर्घटना की कहानी को झुठला रहे थे। पुलिस ने शुरू में पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अनदेखा किया।
​अब पीड़ित मां नीरज देवी ने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई है कि मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच हो और उनके बेटे के हत्यारे (पत्नी और उसके प्रेमी) को कठोर सजा मिले।
​पीड़ित का संपर्क: नीरज देवी (मां) - 9627214183
​अटल सत्य टी वी न्यूज़ 24 इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से न्याय की मांग करता है। क्या वाकई एक पत्नी ने अपनी हवस और लालच के लिए पति की बलि दे दी? इस खुलासे के बाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
​रिपोर्ट: अटल सत्य टी वी न्यूज़ 24 टीम दीपक भारतद्वाज

भरत तिवारी एनकाउंटर सच या साजिश

विशेष रिपोर्ट: क्या व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना ही अपराध है? भरत तिवारी प्रकरण पर उठते तीखे सवाल
​लखनऊ: अक्सर कहा जाता है कि कलम की ताकत तलवार से बड़ी होती है, लेकिन जब वही कलम या आवाज व्यवस्था की कमियों को उजागर करने लगती है, तो सिस्टम उसे 'अपराधी' का चोला पहनाने में देर नहीं करता। कुछ ऐसा ही मामला अब चर्चा का केंद्र बना है, जहाँ भरत तिवारी नामक व्यक्ति के निधन के बाद स्थानीय लोगों का उमड़ा जनसैलाब कई गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
​जन-भावनाओं का ज्वार: अपराधी या जननायक?
​अगर भरत तिवारी एक 'खूंखार अपराधी' थे, तो उनके जाने पर स्थानीय लोगों का हुजूम क्यों उमड़ पड़ा? लोगों को रोते हुए देखना और उन्हें 'देवता' या 'भगवान' का दर्जा देना किसी आम अपराधी के साथ नहीं होता। यह दृश्य यह सोचने पर मजबूर करता है कि जो व्यक्ति पुलिस की फाइलों में 'बदमाश' था, वह जनता की नजरों में मसीहा कैसे बन गया?
​क्या माफिया के पास बंगला और गाड़ियां नहीं होतीं?
​आरोप है कि भरत तिवारी माफिया थे। लेकिन क्या एक माफिया की परिभाषा केवल 'अपराध' तक सीमित है? अगर वे माफिया थे, तो करोड़ों की संपत्ति, लग्जरी कारें और आलीशान बंगले कहाँ हैं? साधारण जीवन-शैली और माफिया होने के दावों के बीच का यह विरोधाभास सीधे तौर पर सिस्टम की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
​फाइलों में दर्ज 'इतिहास' पर संदेह
​कहा जाता है कि उन पर हिस्ट्रीशीटर होने और सैकड़ों मुकदमे होने का तमगा लगा था। लेकिन हकीकत के धरातल पर उन मुकदमों की वास्तविकता क्या है? यदि पुलिस पर गोलियां बरसाने जैसे संगीन आरोप थे, तो फिर कोई पुलिसकर्मी घायल क्यों नहीं हुआ? क्या ये मुकदमे केवल एक व्यक्ति की आवाज को दबाने का जरिया मात्र थे?
​अंतिम इच्छा: देश प्रेम या दिखावा?
​भरत तिवारी का वह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने शरीर को सेना के लिए दान करने की बात कह रहे हैं। एक कथित 'देशद्रोही' अपनी आखिरी सांसों में देश की सेवा के बारे में क्यों सोचेगा? यह सवाल सिस्टम के उन दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है, जो उन्हें किसी बड़े खतरे के रूप में पेश करते रहे।
​निष्कर्ष: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की कीमत
​अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24 यह सवाल पूछता है कि क्या आज के दौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना इतना महंगा पड़ गया है कि उसकी कीमत व्यक्ति को अपनी छवि और अंततः अपने जीवन से चुकानी पड़ती है? भरत तिवारी का मामला केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आईना है जहाँ 'सिस्टम' अपनी नाकामी छुपाने के लिए किसी को भी अपराधी घोषित कर सकता है।
​क्या यह समाज की विडंबना नहीं कि जिसे लोग 'देवता' मान रहे हैं, उसे कानून 'अपराधी' मानता रहा? इस अंतर के पीछे छिपी सच्चाई की जांच कौन करेगा?
​अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24 के लिए विशेष टीम की रिपोर्ट।
​नोट: यह खबर आपके द्वारा दिए गए बिंदुओं के आधार पर तैयार की गई है। पत्रकारिता के मापदंडों के अनुसार, किसी भी मामले में सत्यता की पुष्टि के लिए संबंधित साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच का होना अत्यंत आवश्यक है।
​क्या आपको लगता है कि इस मामले में किसी स्वतंत्र न्यायिक आयोग से जांच की जानी चाहिए ताकि जनता के सामने पूरी सच्चाई आ सके?

नकली नोटों के बदले लेते थे असली नोट लखनऊ पुलिस ने किया पर्दाफाश

लखनऊ में नकली नोटों का बड़ा भंडाफोड़: 14 लाख की जाली करेंसी के साथ 3 गिरफ्तार, अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश 
​लखनऊ: राजधानी में नकली नोटों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मड़ियांव थाना पुलिस ने एक अंतरजनपदीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से लगभग 14 लाख रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की है।
​घैला पुल के पास हुई गिरफ्तारी
​पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के उत्तरी जोन में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मड़ियांव पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी। इस इनपुट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने घैला पुल के निकट एक टीन शेड के पास दबिश दी और तीन संदिग्धों को धर दबोचा।
​पकड़े गए आरोपियों की पहचान आलोक सिंह, सोनू गौंड उर्फ गोलू और बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी मूल रूप से आजमगढ़ जिले के निवासी बताए जा रहे हैं।
​बरामदगी और कार्यप्रणाली
​तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में नकली नोट बरामद हुए:
​500 रुपये के नकली नोट: 1402 (कीमत 7,01,000 रुपये)
​100 रुपये के नकली नोट: 6946 (कीमत 6,94,600 रुपये)
​कुल बरामदगी: 13 लाख 95 हजार 600 रुपये।
​पूछताछ में पता चला है कि आरोपी नकली नोटों को असली नोटों के बदले बाजार में खपाने का काम करते थे। इसके बदले वे मोटा कमीशन वसूलते थे और अवैध कमाई से अपने शौक पूरे करते थे। पुलिस ने इनके पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है।
​मामला दर्ज और जांच जारी
​मड़ियांव पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 273/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 179 और 180 में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि नकली नोटों की सप्लाई कहाँ से हो रही थी और इस गिरोह के तार कहाँ-कहाँ जुड़े हैं। साथ ही, तीनों आरोपियों के पुराने आपराधिक इतिहास का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
​पुलिस टीम को मिला इनाम
​इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस उपायुक्त (उत्तरी) ने गिरफ्तारी करने वाली मड़ियांव पुलिस टीम की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें 10 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।
​पुलिस की इस कार्रवाई को नकली नोटों के नेटवर्क पर एक बड़ी चोट माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस गिरोह के मुख्य सरगना तक पुलिस कब तक पहुँचती है।
​रिपोर्ट: तौफीक, ब्यूरो चीफ, लखनऊ
अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24

लखनऊ में ऑटो चालक का दरिंदगी खेल खत्म पुलिस एनकाउंटर में पैर में लगी गोली बाबा का लंगड़ा ऑपरेशन सक्सेसफुल

लखनऊ दहला: ऑटो चालक की दरिंदगी, पुलिस मुठभेड़ में अपराधी ढेर!
​अटल सत्य टी वी न्यूज 24 | लखनऊ
​लखनऊ: राजधानी लखनऊ में ऑटो चालकों द्वारा लगातार दी जा रही आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के सिलसिले के बीच, पारा पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। परीक्षा देने जा रही युवतियों को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश करने वाले एक शातिर ऑटो चालक को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान धर दबोचा। जवाबी फायरिंग में आरोपी के पैर में गोली लगी है।
​क्या है पूरा मामला?
​मिली जानकारी के अनुसार, आज दिनांक 08 जून 2026 की सुबह, दो छात्राएं परीक्षा देने के लिए चारबाग बस अड्डे से आलमबाग जाने के लिए एक ऑटो में सवार हुई थीं। ऑटो चालक, जिसकी पहचान हसीब (पुत्र स्व. सत्तार, निवासी: ग्राम मिर्जानपुर, थाना कछौना, हरदोई) के रूप में हुई है, युवतियों को सही गंतव्य पर ले जाने के बजाय पारा थाना क्षेत्र के रामलीला ग्राउंड के पास सुनसान इलाके में ले गया।
​वहाँ उसने छात्राओं के साथ जबरदस्ती करने का कुत्सित प्रयास किया। जब छात्राओं ने विरोध किया, तो दरिंदे ने उनके साथ मारपीट की, अभद्रता की और उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया।
​पुलिस की त्वरित कार्रवाई
​मामले की गंभीरता को देखते हुए पारा पुलिस ने तत्काल सुसंगत धाराओं (मु0अ0सं0-403/2026, धारा- 75/76/352/115(2)/118(1) बी0एन0एस0) में अभियोग पंजीकृत किया। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की, तो आरोपी हसीब ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। पुलिस की आत्मरक्षात्मक जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उपचार हेतु रानी लक्ष्मीबाई चिकित्सालय भेज दिया है।
​पुलिस ने घटना में प्रयुक्त ऑटो (UP32 PN 8865), एक तमंचा और कारतूस बरामद किए हैं।
​आदतन अपराधी है हसीब
​जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी हसीब एक शातिर और आदतन अपराधी है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी वह जनपद हरदोई के थाना सण्डीला क्षेत्र में इसी प्रकार की जघन्य वारदात को अंजाम दे चुका है। उस मामले में भी वह महिला के साथ दुष्कर्म का आरोपी रहा है और जेल की हवा खा चुका है।
​पुलिस की चेतावनी: राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। ऑटो चालकों की आड़ में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
​अटल सत्य टी वी न्यूज 24 के लिए विशेष रिपोर्ट।